राजस्थान की महत्वाकांक्षी ‘रामजल सेतु लिंक परियोजना’ फिलहाल सियासी गणित के चलते सुस्त पड़ती नजर आ रही है। सवाई माधोपुर जिले में बनास नदी पर प्रस्तावित डूंगरी बांध को लेकर राज्य सरकार ‘वेट एंड वॉच’ की नीति अपना रही है। सूत्रों के अनुसार, आगामी पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों को देखते हुए सरकार किसी भी तरह के जन-विरोध का जोखिम नहीं उठाना चाहती, जिसके चलते प्रोजेक्ट की गति धीमी कर दी गई है।
बीसलपुर से भी विशाल होगा यह बांध डूंगरी बांध की परिकल्पना राजस्थान के जल संकट को खत्म करने के लिए की गई है। इसकी भराव क्षमता 1588 एमसीएम (MCM) प्रस्तावित है, जो कि टोंक स्थित बीसलपुर बांध से करीब डेढ़ गुना ज्यादा है। यह बांध रणथंभौर और कैलादेवी वाइल्डलाइफ सेंचुरी की पहाड़ियों के बीच बनेगा, जिसके लिए ग्लोबल टाइगर फोरम की वाइल्ड लाइफ स्टडी भी पूरी हो चुकी है।
4300 से अधिक मकान आएंगे डूब क्षेत्र में परियोजना के डिजाइन के अनुसार, बांध बनने से सवाई माधोपुर और आसपास के 16 गांव प्रभावित होंगे। सर्वे के मुताबिक, करीब 4387 मकान और भवन डूब क्षेत्र में आएंगे। इनमें से 9 गांव ऐसे हैं जिनकी 70 से 100 प्रतिशत आबादी को विस्थापित करना पड़ेगा। पूर्व में हुए भारी विरोध और महापंचायतों को देखते हुए सरकार अब पुनर्वास और मुआवजे की रणनीति पर बहुत सतर्कता से काम कर रही है।
लागत बढ़ने की आशंका सरकार ने निकाय चुनाव टलवाने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया है। यदि चुनाव और देरी से होते हैं, तो प्रोजेक्ट की समय सीमा बढ़ना तय है। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्माण में देरी से प्रोजेक्ट की लागत (जो वर्तमान में करीब 1000 करोड़ से अधिक संभावित है) में भारी इजाफा हो सकता है।
मंत्री का बयान: जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत का कहना है कि, “रामजल सेतु लिंक परियोजना राज्य के बेहतर जल प्रबंधन के लिए मील का पत्थर साबित होगी। हम प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और पर्यावरण संतुलन का पूरा ध्यान रखते हुए इस प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहे हैं।”