साइबर ठगी पर सरकार सख्त: अर्बन कोऑपरेटिव बैंकों को मजबूत साइबर सिक्योरिटी और जोखिम प्रबंधन के निर्देश

Vidushi Singh

बैंकिंग क्षेत्र में तेजी से बढ़ते डिजिटल और तकनीकी इस्तेमाल के साथ साइबर अपराधों के बढ़ते खतरे को देखते हुए राजस्थान सरकार ने अर्बन कोऑपरेटिव बैंकों को साइबर फ्रॉड की रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। शासन सचिव, सहकारिता डॉ. समित शर्मा ने कहा कि बैंकों को आधुनिक तकनीक अपनाने के साथ-साथ साइबर अपराधों से बचाव के लिए मजबूत व्यवस्था विकसित करनी होगी।

मंगलवार को प्रदेश के अर्बन कोऑपरेटिव बैंकों के सामने वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों का मूल्यांकन तथा आगे की दिशा को लेकर आयोजित कार्यशाला में डॉ. समित शर्मा ने बैंकों की कार्यप्रणाली, डिजिटल बैंकिंग, जोखिम प्रबंधन और साइबर सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।

डिजिटल बैंकिंग के साथ साइबर अपराध भी बढ़े

डॉ. समित शर्मा ने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र में हर दिन तकनीक का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इसके साथ ही साइबर अपराधों का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में अर्बन कोऑपरेटिव बैंकों के लिए जरूरी है कि वे नवीनतम तकनीक को अपनाने के साथ साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए प्रभावी उपायों को प्राथमिकता दें।

उन्होंने कहा कि बैंकों को न केवल अपने अस्तित्व को मजबूत बनाए रखना है, बल्कि सहकारिता से जुड़े सदस्यों को समावेशी और बेहतर बैंकिंग सेवाएं भी उपलब्ध करानी हैं। इसके लिए डिजिटल तकनीक और साइबर सुरक्षा दोनों पर समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है।

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डोर स्टेप बैंकिंग और डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देने पर जोर

शासन सचिव ने सभी अर्बन कोऑपरेटिव बैंकों से भारत सरकार की ‘सहकार से समृद्धि’ कार्ययोजना के तहत अपने उपभोक्ताओं को डोर स्टेप बैंकिंग की सुविधा उपलब्ध कराने और डिजिटल बैंकिंग सेवाओं के विस्तार में आगे आने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ बैंकिंग सेवाओं को अधिक सुविधाजनक और तकनीक आधारित बनाना जरूरी है। डिजिटल बैंकिंग के विस्तार से ग्राहकों को बैंकिंग सेवाएं आसानी से उपलब्ध हो सकती हैं, लेकिन इसके साथ सुरक्षा के स्तर को भी मजबूत करना होगा।

जोखिम प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश

डॉ. समित शर्मा ने अर्बन कोऑपरेटिव बैंकों को जोखिम प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि बैंकों को ऐसा मजबूत तंत्र विकसित करना चाहिए, जिससे संभावित जोखिम की पहचान पहले ही की जा सके।

उन्होंने कहा कि समय रहते जोखिम की पहचान और उसके समाधान की व्यवस्था होने से बैंकिंग प्रणाली में उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ेगा। साथ ही बैंक अपने ग्राहकों को त्वरित और प्रभावी सेवाएं उपलब्ध कराने में भी सक्षम होंगे।

वित्त और साइबर सुरक्षा में निवेश जरूरी

कार्यशाला में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की आवश्यकता पर जोर देते हुए डॉ. समित शर्मा ने कहा कि बैंकों को वित्तीय संसाधनों के साथ साइबर सुरक्षा में भी निवेश करना चाहिए। उन्होंने बैंक कर्मचारियों को नई तकनीकों के अनुरूप तैयार करने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने कहा कि कर्मचारियों का लगातार प्रशिक्षण बेहद जरूरी है, ताकि वे नई तकनीक, डिजिटल बैंकिंग प्रणाली और साइबर सुरक्षा से जुड़े खतरों को बेहतर तरीके से समझ सकें। प्रशिक्षित कर्मचारी साइबर फ्रॉड की आशंका को पहचानने और समय रहते उचित कदम उठाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

NUCFDC की सदस्यता लेने की सलाह

डॉ. समित शर्मा ने अर्बन कोऑपरेटिव बैंकों को नेशनल अर्बन कोऑपरेटिव बैंक फाइनेंशियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NUCFDC) की सदस्यता प्राथमिकता से लेने की सलाह दी।

उन्होंने बताया कि NUCFDC अर्बन कोऑपरेटिव बैंकों को तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ बैंकिंग क्षेत्र में विविधता के नए अवसर और वित्तीय सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद करता है।

साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल से जुड़ने पर जोर

साइबर फ्रॉड के मामलों में तेजी से कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए डॉ. समित शर्मा ने बैंकों से I4C यानी इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर द्वारा संचालित नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर ऑनबोर्ड होने को कहा।

उन्होंने कहा कि साइबर फ्रॉड की स्थिति में त्वरित कार्रवाई के लिए बैंकों का इस व्यवस्था से जुड़ा होना महत्वपूर्ण है। इससे साइबर अपराध की सूचना समय पर दर्ज कराने और संबंधित मामलों में जल्द कार्रवाई की प्रक्रिया को मजबूत किया जा सकेगा।

27 अर्बन कोऑपरेटिव बैंकों के CEO ने लिया हिस्सा

इस कार्यशाला में प्रदेश के 27 अर्बन कोऑपरेटिव बैंकों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEO) ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने बैंकिंग क्षेत्र के सामने मौजूद मौजूदा चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए।

कार्यशाला में अपेक्स बैंक के पूर्व प्रबंध निदेशक एवं अतिरिक्त रजिस्ट्रार सीनियर स्केल संजय पाठक सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। चर्चा के दौरान डिजिटल बैंकिंग, साइबर सुरक्षा, जोखिम प्रबंधन और तकनीकी बदलावों के अनुरूप बैंकिंग सेवाओं को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

कुल मिलाकर, राजस्थान में अर्बन कोऑपरेटिव बैंकों को डिजिटल युग की चुनौतियों के लिए तैयार करने और साइबर फ्रॉड के जोखिम को कम करने के लिए तकनीकी सुरक्षा, कर्मचारी प्रशिक्षण और जोखिम प्रबंधन को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

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