जयपुर के बिचून क्षेत्र में स्थित 500 साल पुराने ऐतिहासिक धार्मिक स्थल ‘भैराणा धाम’ के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। रीको (RIICO) द्वारा यहाँ प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और साधु-संतों में भारी आक्रोश है। इस प्रस्ताव के खिलाफ राजस्थान के ‘ट्री मैन’ के नाम से प्रसिद्ध समाजसेवी अमर भहड़ा और दादू पंथी संतों ने मोर्चा खोल दिया है।
40 हजार पेड़ों और जैव विविधता पर खतरा
समाजसेवी अमर भहड़ा ने इस औद्योगिक प्रस्ताव को तुरंत निरस्त करने की मांग की है। उनका तर्क है कि यह क्षेत्र केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि प्राकृतिक संपदा का खजाना है।
- यहाँ औद्योगिक क्षेत्र बनने से लगभग 40,000 से अधिक हरे-भरे पेड़ काट दिए जाएंगे।
- लाखों पशु-पक्षियों का आवास और प्राकृतिक जल स्रोत पूरी तरह नष्ट हो जाएंगे।
- भहड़ा ने अपील की है कि रीको को किसी बंजर भूमि पर स्थानांतरित किया जाए ताकि इस हरित क्षेत्र को बचाया जा सके।
15 अप्रैल से संतों का ‘अग्नि तप’
धार्मिक स्थल की पवित्रता की रक्षा के लिए साधु-संतों ने आर-पार की लड़ाई शुरू कर दी है। दादू पंथी प्रकाश दास महाराज सहित अन्य संत 15 अप्रैल से लगातार अग्नि तप और आमरण अनशन पर बैठे हैं। संतों ने प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी है:
- यदि सरकार मांगें नहीं मानती, तो संत जिंदा समाधि लेने को मजबूर होंगे।
- रामरतन दास महाराज और देव जी महाराज ने कहा कि जरूरत पड़ने पर हज़ारों श्रद्धालु जयपुर कूच करेंगे।
प्रदूषण और आस्था का अपमान
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यहाँ उद्योग लगने से वायु और जल प्रदूषण तेजी से बढ़ेगा, जिससे क्षेत्र की शांति और पवित्रता भंग होगी। लोग अपनी पुश्तैनी आस्था और पर्यावरण के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त करने को तैयार नहीं हैं।
प्रमुख मांग: संरक्षित क्षेत्र घोषित हो धाम
संघर्ष समिति और अमर भहड़ा की मुख्य मांग है कि भैराणा धाम के आसपास के वन क्षेत्र को ‘संरक्षित क्षेत्र’ घोषित किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इस योजना को तुरंत नहीं रोका गया, तो यह विरोध एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले लेगा। फिलहाल प्रशासन के मौन रहने से क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।