लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को तालेड़ा क्षेत्र के विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाते हुए 109 करोड़ रुपये के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने क्षेत्रवासियों को संबोधित करते हुए एक विजन साझा किया कि तालेड़ा आने वाले समय में देश के सबसे बड़े एग्रो-इंडस्ट्रीज हब के रूप में पहचाना जाएगा।
एग्रो-इंडस्ट्री हब से खुलेगा रोजगार का द्वार ओम बिरला ने कहा कि जिस तरह कोटा ने ‘एजुकेशन हब’ बनकर छोटे व्यापारियों और हर वर्ग को रोजगार दिया, ठीक वैसे ही तालेड़ा में उद्योगों का जाल बिछाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि तालेड़ा में आज देश के किसी भी अन्य इलाके के मुकाबले सबसे ज्यादा एग्रो इंडस्ट्रीज हैं। तेजी से विकसित हो रही हाउसिंग कॉलोनियों और उद्योगों से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अनगिनत अवसर पैदा होंगे।
सब्जियों और दूध के लिए लगेगा प्रोसेसिंग प्लांट किसानों की आय बढ़ाने के लिए बड़ी घोषणा करते हुए बिरला ने बताया कि:
- मदर डेयरी (सफल) अब क्षेत्र के किसानों से मटर और भिंडी जैसी सब्जियों की 100% खरीदारी करेगी।
- जल्द ही तालेड़ा में मदर डेयरी द्वारा सब्जियों और दूध का एक विशाल प्रोसेसिंग प्लांट लगाया जाएगा।
- मिडिल ईस्ट में युद्ध के कारण चावल निर्यात में आ रही बाधाओं पर उन्होंने किसानों को आश्वस्त किया कि यह संकट जल्द ही टल जाएगा।
नहरों का जीर्णोद्धार और ईआरसीपी का लाभ सिंचाई सुविधाओं पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि गरडदा बांध की नहरों के लिए 32 करोड़ रुपये के टेंडर हो चुके हैं और अगले 25-30 दिनों में काम शुरू हो जाएगा। इसके अलावा, ERCP (ईआरसीपी) योजना के तहत करवर, इंद्रगढ़ और बूंदी के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाया जाएगा। गरडदा बांध से 109 गांवों को पीने का पानी उपलब्ध कराने का 70 प्रतिशत काम भी पूरा हो चुका है।
बुनियादी सुविधाओं में क्रांतिकारी सुधार बिरला ने क्षेत्र में आए बड़े बदलावों को गिनाते हुए कहा:
- थ्री-फेज बिजली: किसानों को अब दिन में ही खेती के लिए थ्री-फेज बिजली मिलना शुरू हो गई है।
- हर घर नल: नौनेरा बांध का शुद्ध पानी अब हैंडपंप की जगह सीधे नलों के जरिए घरों तक पहुंचेगा।
- सड़क संपर्क: क्षेत्र का कोई भी गांव या मजरा अब पक्की सड़क से अछूता नहीं रहेगा।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में ‘चलता-फिरता अस्पताल’ चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ करते हुए अब दो पंचायतों के बीच PHC और चार पंचायतों पर CHC की सुविधा दी जा रही है। ‘चलता-फिरता अस्पताल’ गांव-गांव पहुंचकर 27 तरह की नि:शुल्क जांचें और दवाएं उपलब्ध करा रहा है। साथ ही, ‘सुपोषित मां अभियान’ के जरिए गर्भवती महिलाओं को 10 महीने तक पोषण किट दी जा रही है।