राजस्थान में 18 सरकारी पीटीआई बर्खास्त: डिग्री मिसमैच होने के बाद हुई कार्रवाई, 29 महीने से कर रहे थे नौकरी

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बांसवाड़ा जिले के सरकारी स्कूलों में पिछले करीब 29-30 महीनों से शारीरिक शिक्षक (PTI) के पद पर तैनात 18 कार्मिकों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) जयदीप पुरोहित ने निदेशालय से प्राप्त आदेशों के बाद इन शिक्षकों की बर्खास्तगी की आधिकारिक पुष्टि की है। यह पूरी कार्रवाई ‘डिग्री मिसमैच’ और दस्तावेजों की विसंगतियों के चलते की गई है।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद ग्रेड थर्ड पीटीआई भर्ती-2022 से जुड़ा है। इन शिक्षकों ने आवेदन के समय जो शैक्षणिक डिग्रियां और दस्तावेज दिखाए थे, वे जॉइनिंग के बाद जमा कराए गए मूल दस्तावेजों से मेल नहीं खा रहे थे।

  • सुनवाई का मौका: कर्मचारी चयन बोर्ड ने इन अभ्यर्थियों को अपना पक्ष रखने के लिए व्यक्तिगत सुनवाई का मौका भी दिया था।
  • पात्रता निरस्त: बोर्ड की सुनवाई के दौरान ये शिक्षक न तो संतोषजनक जवाब दे पाए और न ही सही दस्तावेज पेश कर सके। इसके बाद बोर्ड ने इनकी पात्रता को अवैध घोषित करते हुए शिक्षा विभाग को कार्रवाई के निर्देश दिए।

प्रमुख क्षेत्रों के स्कूलों में थे तैनात

बर्खास्त किए गए ये 18 शिक्षक जिले के विभिन्न ग्रामीण और ब्लॉक क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे थे:

प्रभावित क्षेत्र: सज्जनगढ़, गांगड़तलाई, बागीदौरा और आनंदपुरी ब्लॉक के स्कूलों में ये शिक्षक कार्यरत थे।

शुक्रवार (17 अप्रैल) को निदेशालय से अंतिम सूची प्राप्त होते ही डीईओ कार्यालय ने सक्रियता दिखाते हुए संबंधित स्कूलों के प्रिंसिपल्स को तलब किया और दो दिनों के भीतर बर्खास्तगी की प्रक्रिया पूरी की गई।


हाईकोर्ट और जांच कमेटी का रुख

शुरुआती जांच में जब फर्जीवाड़ा सामने आया, तो ये अभ्यर्थी अपनी बर्खास्तगी रोकने के लिए हाईकोर्ट की शरण में चले गए थे।

  1. कोर्ट के निर्देश: हाईकोर्ट के आदेश पर ही दस्तावेजों की सूक्ष्म जांच के लिए एक 3 सदस्यीय विशेष कमेटी का गठन किया गया।
  2. पुष्टि: कमेटी ने जब दोबारा रिकॉर्ड्स को खंगाला, तो पाया कि डिग्रियां वास्तव में मिसमैच थीं। इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर विभाग ने अंतिम फैसला लिया।
  3. गहन जांच: उदयपुर के संयुक्त निदेशक को एक अतिरिक्त संदिग्ध मामला भी भेजा गया है, जिस पर अभी निर्णय होना बाकी है।

2022 भर्ती का काला इतिहास

2022 में पीटीआई के कुल 5,546 पदों पर भर्ती निकाली गई थी। चयन प्रक्रिया के बाद जब दस्तावेजों का सत्यापन हुआ, तो बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े की बू आई। एसओजी (SOG) की जांच में 165 से ज्यादा अभ्यर्थियों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले दर्ज हुए। अब तक इस भर्ती से जुड़े 134 से ज्यादा शिक्षकों को पहले ही बर्खास्त किया जा चुका है, जिसमें अब बांसवाड़ा के ये 18 नाम भी जुड़ गए हैं।

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