काम कराया पर दाम नहीं दिया! बांसवाड़ा में साल भर से अटके मनरेगा के करोड़ों रुपये

Desk

राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के सज्जनगढ़ क्षेत्र में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) पूरी तरह से पटरी से उतर चुकी है। क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में स्थिति इतनी विकट हो गई है कि वहां कामकाज ठप होने से तालेबंदी जैसे हालात बन गए हैं। पिछले एक वर्ष से अधिक समय से लंबित भुगतानों और नए कार्यों की स्वीकृति न मिलने के कारण स्थानीय जनप्रतिनिधियों और श्रमिकों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

रोजगार का संकट और गुजरात पलायन सज्जनगढ़ पंचायत समिति की 38 ग्राम पंचायतों में पिछले 6 महीनों से एक भी नया कार्य स्वीकृत नहीं किया गया है। मनरेगा, जो आदिवासी क्षेत्र में आजीविका का मुख्य आधार थी, उसके बंद होने से हजारों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। पेट पालने की मजबूरी में बड़ी संख्या में श्रमिक प्रतिदिन पड़ोसी राज्य गुजरात की ओर पलायन कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन इस गंभीर स्थिति को जानते हुए भी मूकदर्शक बना हुआ है।

करोड़ों की देनदारी और बाजार पर असर जानकारी के अनुसार, पूर्व में पूरे हो चुके कार्यों के मेट, कारीगर और सामग्री मद का भुगतान पिछले 1 से 2 साल से अटका हुआ है। पंचायतों ने समय पर ऑनलाइन बिल प्रस्तुत कर दिए थे, लेकिन बजट के अभाव में भुगतान नहीं हो सका। करोड़ों रुपये की इस बकाया देनदारी ने न केवल जनप्रतिनिधियों पर आर्थिक दबाव डाला है, बल्कि स्थानीय व्यापार को भी प्रभावित किया है। भुगतान न होने से ग्रामीण क्षेत्रों के बाजारों में भारी मंदी देखी जा रही है।

BAP ने दी आंदोलन की चेतावनी भारतीय आदिवासी पार्टी (BAP) के ब्लॉक अध्यक्ष मानसिंह डामोर ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि टीएसपी (आदिवासी क्षेत्र) के विकास को जानबूझकर रोका जा रहा है। उन्होंने प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि जल्द ही श्रमिकों और व्यापारियों के हितों में फैसला नहीं लिया गया और लंबित भुगतान जारी नहीं हुआ, तो पार्टी उग्र आंदोलन की रणनीति तैयार करेगी।

प्रशासन का पक्ष इस मामले पर पंचायत समिति के विकास अधिकारी (BDO) का कहना है कि नई योजना के तहत कार्यों की स्वीकृति सरकार की नई गाइडलाइन आने के बाद ही दी जा सकेगी। लंबित भुगतान के विषय में उन्होंने स्पष्ट किया कि जैसे ही केंद्र सरकार से राशि प्राप्त होगी, प्राथमिकता के आधार पर मेट और कारीगरों का भुगतान कर दिया जाएगा।

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