देश की राजनीति में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। महिला आरक्षण विधेयक को लागू करने की जटिल प्रक्रिया और इसके श्रेय को लेकर राजस्थान के दो दिग्गज राजनेताओं—पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और भाजपा के राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी—के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। जहाँ गहलोत इसे कांग्रेस की मूल सोच बता रहे हैं, वहीं तिवाड़ी ने इसे लागू करने के लिए सरकार के नए रोडमैप का खुलासा किया है।
गहलोत का हमला: “सोनिया गांधी की सोच, सरकार कर रही गुमराह”
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि महिला आरक्षण की असल अवधारणा सोनिया गांधी की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास पूर्ण बहुमत होने के बावजूद वह सभी दलों को विश्वास में लेने के बजाय एकतरफा और विवादास्पद तरीके से काम कर रही है। गहलोत ने कहा, “पहले जनगणना और परिसीमन की शर्त रखी गई और अब नया एक्ट लाकर जनता को गुमराह किया जा रहा है। सरकार की कार्यशैली केवल भ्रम पैदा करने वाली है।”
तिवाड़ी का पलटवार: “16 अप्रैल को संसद में होगा बड़ा फैसला”
भाजपा सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने गहलोत के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। तिवाड़ी ने बताया कि जनगणना में हो रही देरी को देखते हुए अब सरकार 2011 की जनसंख्या को आधार मानकर महिला आरक्षण लागू करने की दिशा में बढ़ रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इसी उद्देश्य के लिए संसद सत्र को 16 और 17 अप्रैल तक बढ़ाया गया है, ताकि जरूरी विधायी प्रक्रिया पूरी की जा सके। तिवाड़ी ने कहा, “यह बिल नए संसद भवन में सर्वसम्मति से पारित हुआ था। परिसीमन में समय लगता है, इसलिए इसे बेवजह टालना सही नहीं है।”
सियासी मायने: क्रेडिट लेने की मची होड़
महिला आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल सैद्धांतिक रूप से एकमत नजर आते हैं, लेकिन इसे लागू करने के ‘तरीके’ और ‘समय’ को लेकर मतभेद गहरा हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में दोनों पार्टियों के बीच इस ऐतिहासिक कदम का श्रेय (Credit) लेने की होड़ और तेज होगी।
हालांकि, घनश्याम तिवाड़ी ने यह साफ कर दिया है कि इस प्रक्रिया का आगामी विधानसभा चुनावों से कोई सीधा संबंध नहीं है, क्योंकि परिसीमन और क्रियान्वयन में समय लगेगा और यह मौजूदा चुनावों में प्रभावी नहीं होगा।