जलभराव का खतरा: कागजों में साफ हुए शहर के नाले, धरातल पर कचरे का अंबार

Madhu Manjhi

अलवर। शहर में गंदगी और कचरे से अटे पड़े नाले नगर निगम के दावों और भ्रष्टाचार की गवाही दे रहे हैं। हर साल मानसून से पहले नालों की सफाई के नाम पर करीब 1 करोड़ रुपए का भारी-भरकम बजट खर्च किया जाता है। इसके बावजूद शहर के प्रमुख नालों में कचरे का अंबार यह साबित करता है कि सफाई का पैसा धरातल पर लगने की बजाय भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है। यदि हालात यही रहे, तो इस बार भी बारिश में शहर के अधिकांश इलाके जलभराव के कारण तालाब में तब्दील हो जाएंगे।

ड्रेनेज सिस्टम बदहाल, जनप्रतिनिधि और अधिकारी बेपरवाह

मानसून की दस्तक सिर पर है, लेकिन शहर का ड्रेनेज सिस्टम बारिश का पानी झेलने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं है। पिछले सालों में हुई गंभीर जलभराव की समस्या से न तो अधिकारियों ने कोई सबक लिया है और न ही जनप्रतिनिधियों ने। कई जगहों पर नालों के जाल तक टूट चुके हैं, जो बारिश के दौरान बड़े हादसों को न्योता दे रहे हैं। अगर अलवर नगर निगम के अफसरों की नींद समय रहते नहीं टूटी, तो स्वर्ग रोड, गायत्री मंदिर मार्ग, गोपाल टॉकीज मार्ग और चूड़ी मार्केट जैसे सर्वाधिक जलभराव वाले इलाके फिर से डूबेंगे।

ग्राउंड रिपोर्ट: प्रमुख नालों की जमीनी हकीकत

राजस्थान पत्रिका द्वारा मानसून की आवक से पहले शहर के ड्रेनेज सिस्टम की पड़ताल की गई। इस खुलासे में सामने आया कि मुख्य मार्गों के कुछ नाले तो साफ मिले, लेकिन वार्डों से जुड़े अधिकांश नाले पूरी तरह कचरे से चोक हैं।

नाले का मार्ग / स्थानअनुमानित लंबाईवर्तमान स्थिति और खामियां
एसएमडी सर्किल से काली मोरी (वाया आरआर कॉलेज)1.5 किमीबीच का हिस्सा साफ है, लेकिन फ्रेंड्स कॉलोनी के बाहर नाले के कट में भारी कचरा भरा हुआ है।
अग्रसेन मार्ग (रोडवेज बस स्टैंड के सामने)4.0 किमीनाले के ऊपर सीसी (CC) निर्माण और पटाव डालकर अतिक्रमण कर लिया गया है। इसकी आज तक सफाई नहीं हुई और यह पूरी तरह गंदगी से अटा है।
गायत्री मंदिर मार्ग2.5 किमीमुख्य भाग से कचरा हटा दिया गया है, लेकिन मुहाने पर कचरा जमा होने से पानी की निकासी पूरी तरह बाधित है।
स्वर्ग रोड4.0 किमीनाले की दीवार ही नहीं बनाई गई है। यह कहीं से साफ तो कहीं कचरे से फुल है। बारिश में यहां से गुजरना खतरे से खाली नहीं।
मीट मार्केट3.0 किमीवर्तमान में दीवार का निर्माण चल रहा है। नाले की सफाई हुई है, लेकिन बारिश से पहले निर्माण पूरा नहीं हुआ तो घरों में पानी भरेगा।

इन इलाकों में रहता है सर्वाधिक जलभराव का खतरा

नाला सफाई में लापरवाही का खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ता है। थोड़ी सी तेज बारिश में ही शहर के निम्नलिखित प्रमुख स्थानों पर जलभराव की गंभीर स्थिति पैदा हो जाती है:

  • होप सर्कस और मुख्य बाजार
  • विवेकानंद सर्किल से बस स्टैंड तक
  • अशोक टॉकीज और मनु मार्ग
  • घंटाघर और एसएमडी सर्किल
  • काली मोरी के नीचे का क्षेत्र
  • गायत्री मंदिर मार्ग और चूड़ी बाजार
  • गोपाल टॉकीज और स्वर्ग रोड

हर साल करोड़ों का बजट पास होने के बाद भी शहर का यही हाल रहना प्रशासन की कार्यशैली पर बड़ा सवालिया निशान लगाता है। अब देखना यह है कि मानसून से पहले बचे हुए समय में नगर निगम प्रशासन अपनी गलतियों को सुधारता है या शहरवासियों को एक बार फिर जलभराव की त्रासदी झेलने के लिए छोड़ दिया जाता है।

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