राजस्थान में पारा चढ़ने के साथ ही गहराते पेयजल संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश की प्रशासनिक मशीनरी को अलर्ट मोड पर डाल दिया है। भीषण गर्मी की तपिश बढ़ने से पहले ग्रामीण क्षेत्रों में सुचारू जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने 18 और 19 अप्रैल को दो दिवसीय राज्यव्यापी विशेष अभियान चलाया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बंद पड़े जल स्रोतों को पुनर्जीवित करना और जल जीवन मिशन (JJM) के कार्यों में तेजी लाना है।
कलक्टर से तहसीलदार तक ग्राउंड जीरो पर मुख्यमंत्री के सख्त रुख के बाद राजस्थान के सभी जिलों में प्रशासनिक अमला दफ्तर छोड़कर गांवों की ओर रुख कर चुका है।
- सघन निरीक्षण: दो दिनों के भीतर प्रदेशभर में कुल 2,677 कार्यों का भौतिक निरीक्षण किया गया।
- अधिकारियों की भागीदारी: जिला कलक्टर, एसडीएम और जलदाय विभाग (PHED) के अभियंताओं ने स्वयं मौके पर जाकर योजनाओं की प्रगति जांची।
ऑन-द-स्पॉट समाधान: 2775 शिकायतों का निस्तारण यह अभियान केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। जलदाय विभाग की करीब 450 तकनीकी टीमों ने युद्धस्तर पर कार्य करते हुए जनता की समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया:
- हैण्डपम्पों का उद्धार: लंबे समय से खराब पड़े 1,535 हैण्डपम्पों को ठीक कर दोबारा चालू किया गया।
- बर्बादी पर लगाम: पाइपलाइनों में रिसाव रोकने के लिए 911 स्थानों पर लीकेज दुरुस्त किए गए।
- तकनीकी सुधार: टंकियों और वितरण केंद्रों पर 329 अन्य मरम्मत कार्य संपन्न किए गए।
जल जीवन मिशन और अमृत योजना पर फोकस अभियान के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में एक-एक बूंद पानी कीमती है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जल जीवन मिशन और अमृत योजना के तहत बिछाई जा रही पाइपलाइनों की गुणवत्ता में कोई समझौता न हो। सरकार का लक्ष्य है कि इस गर्मी में गांवों और ढाणियों की टैंकरों पर निर्भरता को न्यूनतम किया जाए।
सूखे हलक नहीं रहेंगे प्यासे राजस्थान की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए ‘ग्रीष्मकालीन कंटीन्जेंसी’ कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। जहाँ जल स्रोत सूख चुके हैं, वहाँ वैकल्पिक व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के इस ‘वॉटर एक्शन प्लान’ का विजन स्पष्ट है—गर्मी बढ़ने से पहले बुनियादी ढांचा इतना सुदृढ़ हो कि आमजन को पानी के लिए मीलों पैदल न चलना पड़े।