10 साल की सजा का खतरा: महेश जोशी 11 मई तक रिमांड पर, संजय बड़ाया के ‘रिश्वत नेटवर्क’ की तलाश तेज

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जयपुर। राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) का शिकंजा पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी पर कसता जा रहा है। हजारों करोड़ के इस घोटाले में एसीबी की चार्जशीट और प्रारंभिक जांच से सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। यदि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप सिद्ध होते हैं, तो पूर्व मंत्री जोशी और रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल सहित अन्य दोषियों को 10 वर्ष तक की जेल हो सकती है।

एसीबी के तीखे सवाल और जोशी के जवाब

शुक्रवार को एसीबी की एसआईटी ने महेश जोशी से करीब 8 घंटे तक पूछताछ की। जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ‘इरकोन’ (Ircon) द्वारा भेजी गई वह गोपनीय ई-मेल है, जिसमें ठेकेदारों के फर्जीवाड़े की चेतावनी दी गई थी।

पूछताछ के मुख्य अंश:

  • सवाल: जब इरकोन ने ई-मेल के जरिए फर्जीवाड़े की सूचना दे दी थी, तो आपने कमेटी गठन को मंजूरी क्यों दी?
    • जवाब: जोशी ने सारा ठीकरा अधिकारियों पर फोड़ते हुए कहा कि विभागीय अधिकारियों की अनुशंसा पर ही फाइल आगे बढ़ाई गई थी।
  • सवाल: वह ‘गोपनीय’ ई-मेल विभाग से बाहर ठेकेदारों तक कैसे लीक हुई?
    • जवाब: जोशी ने तर्क दिया कि इसकी जानकारी अन्य उच्चाधिकारियों को भी थी, इसलिए लीक कहीं से भी हो सकती है।
  • सवाल: क्या संजय बड़ाया आपके लिए रिश्वत का नेटवर्क चला रहा था?
    • जवाब: सूत्रों के मुताबिक, इस सवाल पर पूर्व मंत्री ने या तो चुप्पी साधे रखी या अनभिज्ञता जताई।

संजय बड़ाया: घोटाले का ‘मास्टरमाइंड’

एसीबी की जांच में संजय बड़ाया का नाम घोटाले के मुख्य सूत्रधार के रूप में उभरा है। चार्जशीट के अनुसार, बड़ाया ही वह व्यक्ति था जो जलदाय विभाग के अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच रिश्वत के लेन-देन की कड़ियां जोड़ता था। फिलहाल बड़ाया विदेश में है। एसीबी उसके भारत लौटने का इंतजार कर रही है ताकि इस पूरे ‘कैश ट्रेल’ (पैसों के लेन-देन का रास्ता) का पर्दाफाश किया जा सके।

11 मई तक रिमांड पर पूर्व मंत्री

एसीबी एसआइटी के सुपरविजन अधिकारी डॉ. रामेश्वर सिंह के नेतृत्व में जांच टीम हर पहलू को खंगाल रही है। अदालत ने महेश जोशी को 11 मई तक एसीबी रिमांड पर भेज दिया है।

जांच का मुख्य फोकस:

  1. फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र वाले ठेकेदारों को वर्क ऑर्डर कैसे मिले?
  2. गोपनीय चेतावनी को किसके इशारे पर नजरअंदाज किया गया?
  3. घोटाले की राशि का वितरण किन-किन सफेदपोशों और अधिकारियों के बीच हुआ?

जल जीवन मिशन में हुआ यह घोटाला राजस्थान की राजनीति में बड़ा भूचाल लेकर आया है, और आने वाले दिनों में कई बड़े नामों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।

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