जयपुर। राजस्थान में पंचायती राज और शहरी निकाय चुनावों (Panchayat and Urban Local Body Elections) को समय पर न कराने को लेकर छिड़ा कानूनी संग्राम अब बेहद दिलचस्प मोड़ पर आ गया है। इस देरी के खिलाफ राज्य चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह के विरुद्ध दायर की गई अवमानना याचिका (Contempt Petition) पर आज राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई टल गई। जस्टिस महेन्द्र कुमार गोयल और जस्टिस अनिल कुमार उपमन की पीठ ने मामले की अगली तारीख 26 मई 2026 तय की है। अदालत ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि मुख्य पीठ द्वारा चुनाव टालने के मूल प्रार्थना पत्र पर फैसला पहले से ही सुरक्षित (Reserved) रखा जा चुका है।
मुख्य खंडपीठ के फैसले का इंतजार
जस्टिस महेन्द्र कुमार गोयल और जस्टिस अनिल कुमार उपमन की बैंच में आज पूर्व विधायक संयम लोढ़ा, गिर्राज सिंह देवंदा व अन्य की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई होनी थी। लेकिन इस बीच, कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की मुख्य खंडपीठ ने राज्य सरकार व चुनाव आयोग के उस मूल प्रार्थना पत्र पर 11 मई 2026 को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसमें चुनाव टालने की अनुमति मांगी गई है। चूंकि मूल अर्जी पर फैसला आना बाकी है, इसलिए अवमानना याचिका की सुनवाई को 26 मई तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
मामले का पूरा घटनाक्रम और विवाद
| तिथि/घटना | कानूनी पहलू और स्थिति |
| हाईकोर्ट का मूल आदेश | अदालत ने पूर्व में स्पष्ट आदेश दिया था कि 15 अप्रैल 2026 तक प्रदेश में सभी निकाय और पंचायत चुनाव संपन्न करा लिए जाएं। |
| आयोग की नई समय सीमा | चुनाव आयोग ने मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण का कार्यक्रम जारी कर 22 अप्रैल तक फाइनल वोटर लिस्ट प्रकाशन की तिथि तय कर दी। |
| अवमानना का आधार | जब फाइनल वोटर लिस्ट ही 22 अप्रैल को आनी थी, तो 15 अप्रैल तक चुनाव कराना नामुमकिन था। इसे सीधे तौर पर अदालती आदेश की अवहेलना माना गया। |
“जानबूझकर चुनाव टाल रही है सरकार और आयोग”
याचिकाकर्ता और पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने अदालत के समक्ष कड़ा रुख अपनाते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग आपसी साठगांठ कर जानबूझकर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को टाल रहे हैं। पिछली सुनवाई पर कड़ी नाराजगी जताते हुए हाईकोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग और चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा था कि उन्होंने अदालत द्वारा तय लक्ष्मण रेखा (15 अप्रैल) का उल्लंघन कर मतदाता सूची के पुनरीक्षण का कार्यक्रम समय सीमा से बाहर का क्यों और किसके आदेश पर तय किया?
दिसंबर तक चुनाव टालने के पक्ष में सरकार के तर्क
दूसरी तरफ, राज्य सरकार ने अपनी एप्लीकेशन में हर महीने की प्रशासनिक, भौगोलिक और व्यावहारिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए अदालत से इन चुनावों को दिसंबर 2026 तक टालने की अपील की है। राज्य चुनाव आयोग ने भी सरकार के तर्कों का समर्थन किया है। आयोग का कहना है कि वर्तमान में ओबीसी (OBC) आरक्षण के नए सिरे से निर्धारण और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी हुए बिना चुनाव कराना तकनीकी और कानूनी रूप से संभव नहीं है।
अब सभी पक्षों की नजरें मुख्य खंडपीठ के सुरक्षित फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि मरुधरा में लोकतंत्र के सबसे जमीनी स्तर (पार्टी विहीन और स्थानीय सरकार) के चुनाव तुरंत होंगे या फिर इसके लिए साल के अंत तक का इंतजार करना होगा।