हाईकोर्ट ने कहा: अधिक अंक आए, फिर भी नियुक्ति नहीं मिली; सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार अब नियुक्ति दें

Desk

राजस्थान हाईकोर्ट ने तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती-2022 के लेवल-2 के उन अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है, जो मेरिट में अधिक अंक लाने के बावजूद अब तक नियुक्ति की बाट जोह रहे थे। जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने सोमवार को कौशल्या जाट व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सरकार को निर्देश दिए हैं कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘सरकार बनाम नमोनारायण शर्मा’ मामले में प्रतिपादित सिद्धांतों का पालन किया जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि अभ्यर्थी संशोधित परिणाम में अधिक अंक प्राप्त करते हैं और पद रिक्त हैं, तो उन्हें नियमानुसार नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता।

मामले की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो अधिवक्ता रामप्रताप सैनी ने कोर्ट को बताया कि 16 दिसंबर 2022 को लेवल-2 के कुल 27,000 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी। परीक्षा के बाद जारी की गई उत्तर कुंजी (Answer Key) को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हुआ, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद विभाग ने उत्तर कुंजी में सुधार करते हुए संशोधित परिणाम जारी किया। इस नए परिणाम में कई अभ्यर्थियों के अंक बढ़ गए और वे चयन की श्रेणी में आ गए, लेकिन इसके बावजूद विभाग ने उन्हें नियुक्ति देने में आनाकानी की।

याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि वर्तमान में इस भर्ती प्रक्रिया में विभिन्न विषयों (जैसे हिंदी, अंग्रेजी, विज्ञान, सामाजिक अध्ययन, संस्कृत और उर्दू) के लगभग 1,647 पद अब भी रिक्त पड़े हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के फैसलों के अनुसार, समान परिस्थिति वाले अभ्यर्थियों को इन रिक्त पदों पर समायोजित किया जाना चाहिए। याचिका में कहा गया कि जब पद खाली हैं और प्रार्थी योग्यता रखते हैं, तो उन्हें तकनीकी कारणों से नौकरी से बाहर रखना उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन है।

हाईकोर्ट ने प्रार्थियों के तर्कों से सहमति जताते हुए याचिकाओं को मंजूर कर लिया है। कोर्ट के इस आदेश के बाद अब शिक्षा विभाग को उन सभी योग्य अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करनी होगी जो संशोधित मेरिट लिस्ट में ऊपर आए हैं। यह फैसला न केवल कौशल्या जाट बल्कि प्रदेश के उन सैंकड़ों अभ्यर्थियों के लिए उम्मीद की नई किरण लेकर आया है, जो लंबे समय से चयन बोर्ड और कोर्ट के चक्कर काट रहे थे। विभाग के पास अब इन खाली पदों को भरने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है।

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