इबोला वायरस का ‘बुंदीबुग्यो’ स्ट्रेन: रूस ने खोजी नई वैक्सीन, जानें इस जानलेवा बीमारी के लक्षण और इतिहास

Madhu Manjhi

वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र से एक बेहद महत्वपूर्ण और राहत देने वाली खबर सामने आई है। इबोला (Ebola) जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारी, जो वर्तमान में डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में तेजी से फैल रही है, के खिलाफ रूस ने एक नई वैक्सीन विकसित करने का दावा किया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा इस प्रकोप को लेकर जताई गई गहरी चिंता के बीच, चिकित्सा विज्ञान के नजरिए से रूस का यह दावा एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभी तक इस वैक्सीन की प्रभावशीलता और विश्वव्यापी उपलब्धता की पूर्ण रूप से स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। यदि यह दावा वैज्ञानिक कसौटी पर खरा उतरता है, तो यह वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी।

रूस का दावा: ‘बुंदीबुग्यो’ स्ट्रेन पर भी करेगी असर

रूस के स्वास्थ्य मंत्री मिखाइल मुराश्को ने आधिकारिक बयान देते हुए दावा किया है कि रूसी वैज्ञानिकों ने इबोला वायरस के नए स्ट्रेन के खिलाफ प्रभावी वैक्सीन तैयार कर ली है।

  • विशेषता: मुराश्को के अनुसार, यह नई वैक्सीन न केवल इबोला के नए स्ट्रेन्स के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करेगी, बल्कि यह विशेष रूप से दुर्लभ और तेजी से फैल रहे ‘बुंदीबुग्यो’ (Bundibugyo) स्ट्रेन से भी बचाव में मददगार साबित होगी।
  • DRC का वर्तमान संकट: यह स्ट्रेन वर्तमान में कांगो (DRC) में प्रकोप का मुख्य कारण बना हुआ है। हालांकि बुंदीबुग्यो स्ट्रेन को इबोला के अन्य स्ट्रेन्स की तुलना में थोड़ा कम घातक माना जाता है, फिर भी यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक अत्यंत गंभीर खतरा है।

कांगो (DRC) में इबोला का कहर: आंकड़ों पर एक नज़र

कांगो के स्वास्थ्य मंत्रालय और WHO की रिपोर्ट के अनुसार, यह वायरस अपने शुरुआती चरण में होने के बावजूद बेहद तेजी से फैल रहा है और इसका संक्रमण अब पड़ोसी देश युगांडा तक भी पहुंच गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 17 मई को इसे अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (Public Health Emergency) घोषित किया गया था।

DRC में इबोला संक्रमण के वर्तमान आंकड़े:

विवरणआंकड़े
संदिग्ध मामले900 से अधिक
संदिग्ध मौतें220
पुष्टि किए गए मामले101
पुष्टि की गई मौतें10

क्या हैं इबोला के लक्षण और यह कैसे फैलता है?

इबोला एक अत्यधिक संक्रामक और खतरनाक वायरस है, जिसकी औसत मृत्यु दर लगभग 50% के आसपास मानी जाती है।

  • फैलने का तरीका: यह वायरस मूल रूप से संक्रमित जानवरों (जैसे चमगादड़ या बंदर) से इंसानों में प्रवेश करता है। इसके बाद, यह मानव-से-मानव के बीच संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों (रक्त, पसीना, लार आदि) के सीधे संपर्क में आने से फैलता है।
  • सावधानी: यह हवा से (Airborne) नहीं फैलता है, लेकिन संक्रमित मरीज की देखभाल करते समय यदि उचित मेडिकल किट (PPE) और सावधानी न बरती जाए, तो संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

इबोला का इतिहास: 2014-2016 का सबसे भयानक प्रकोप

इबोला वायरस की खोज पहली बार वर्ष 1976 में हुई थी। इसके बाद से इसके कई छोटे-बड़े प्रकोप सामने आए हैं।

  • सबसे बड़ी तबाही: इतिहास में इबोला का सबसे बड़ा और जटिल प्रकोप साल 2014 से 2016 के बीच पश्चिम अफ्रीका में देखा गया था।
  • सीमाएं लांघ गया था वायरस: इसकी शुरुआत गिनी (Guinea) से हुई थी और देखते ही देखते यह पड़ोसी देशों सिएरा लियोन (Sierra Leone) और लाइबेरिया (Liberia) तक फैल गया था।
  • उस दौरान हुई मौतों और संक्रमित मामलों की संख्या, 1976 से लेकर 2014 तक के सभी पिछले प्रकोपों के कुल आंकड़ों से भी कहीं अधिक थी, जिसने पूरी दुनिया में गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा कर दिया था। अब रूस की नई वैक्सीन से भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने की उम्मीद जगी है।

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