जयपुर: राजस्थान सरकार के मिड-डे मील योजना आयुक्तालय ने राजकीय विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन (Mid-Day Meal) के लिए नया और संशोधित मेन्यू तथा सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रधानमंत्री पोषण योजना के तहत विद्यार्थियों के स्वास्थ्य, पोषण स्तर और विद्यालयों में शैक्षिक उपस्थिति में सुधार लाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। मिड-डे मील आयुक्त विश्व मोहन शर्मा ने प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को इस संबंध में आदेश जारी कर इसे तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए हैं।
कौन तैयार करेगा भोजन और क्या है दायरा?
आदेशों के अनुसार, कक्षा प्री-प्राइमरी से आठवीं तक के विद्यार्थियों के लिए यह पौष्टिक भोजन विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC), गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), अन्नपूर्णा महिला सहकारी समिति या स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। उल्लेखनीय है कि इस योजना के तहत सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों के बच्चों को गर्म भोजन के साथ-साथ ‘पन्नाधाय बाल गोपाल योजना’ के तहत दूध भी प्रदान किया जाता है।
नया साप्ताहिक मिड-डे मील मेन्यू
विभाग द्वारा जारी नए शेड्यूल के अनुसार स्कूलों में निम्नलिखित मेन्यू के आधार पर भोजन परोसा जाएगा:
- सोमवार: रोटी, दाल और सब्जी।
- मंगलवार: चावल, दाल और सब्जी।
- बुधवार: रोटी, दाल और सब्जी।
- गुरुवार: खिचड़ी, दाल, चावल और सब्जी।
- शुक्रवार: रोटी, दाल और सब्जी।
- शनिवार: रोटी, दाल और सब्जी। (स्थानीय मांग और परिस्थितियों के अनुसार सप्ताह में किसी एक दिन भोजन में बदलाव भी किया जा सकता है।)

पोषण के कड़े मानक और अनिवार्य फल
बच्चों के शारीरिक विकास को ध्यान में रखते हुए भोजन में पोषण के कड़े मानक तय किए गए हैं:
- कैलोरी और प्रोटीन: प्री-प्राइमरी से 5वीं कक्षा तक के बच्चों के भोजन में कम से कम 450 कैलोरी और 12 ग्राम प्रोटीन होना अनिवार्य है। वहीं, कक्षा 6 से 8वीं तक के विद्यार्थियों के लिए 700 कैलोरी और 20 ग्राम प्रोटीन आवश्यक किया गया है।
- फल अनिवार्य: निर्धारित मेन्यू के अतिरिक्त अब विद्यार्थियों को सप्ताह में कम से कम एक दिन फल देना भी अनिवार्य कर दिया गया है।
निरीक्षण में कोताही पर होगी सख्त कार्रवाई
विभाग ने स्पष्ट किया है कि विद्यालयों में इन दिशा-निर्देशों की शत-प्रतिशत पालना सुनिश्चित की जाए। जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) और ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों (BEO) को नियमित रूप से विद्यालयों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। इसकी मासिक रिपोर्ट जिला स्तर पर तैयार कर विभाग को भेजनी होगी। यदि व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही या ढिलाई बरती गई, तो संबंधित कार्मिक या अधिकारी की सीधी जवाबदेही तय की जाएगी।