सावधान ! बच्चों का चिड़चिड़ापन सिर्फ ‘मूड स्विंग’ नहीं, डिप्रेशन का भी हो सकता है संकेत

अक्सर माना जाता है कि डिप्रेशन या अवसाद केवल बड़ों की समस्या है, लेकिन आधुनिक जीवनशैली और बढ़ते दबाव के कारण अब छोटे बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। बच्चों में डिप्रेशन हमेशा उदासी के रूप में नहीं दिखता, बल्कि यह उनके व्यवहार और शारीरिक बदलावों के पीछे छिपा होता है। यदि समय रहते इन संकेतों को नहीं पहचाना गया, तो यह बच्चे के दीर्घकालिक मानसिक विकास को प्रभावित कर सकता है।

कैसे पहचानें बच्चों में डिप्रेशन? (मुख्य लक्षण)

डॉ. ने बताया कि बच्चों में अवसाद को पहचानने के लिए उनके व्यवहार में हो रहे इन बदलावों पर गौर करना ज़रूरी है:

  • व्यवहार में बदलाव: छोटे बच्चे अपनी भावनाओं को शब्दों में नहीं कह पाते, इसलिए वे चिड़चिड़े हो जाते हैं या बार-बार रोने लगते हैं। अगर बच्चा अपनी पसंदीदा गतिविधियों या खेलकूद में रुचि खो दे, तो यह एक बड़ा चेतावनी संकेत है।
  • शारीरिक शिकायतें: बिना किसी डॉक्टरी कारण के बार-बार सिरदर्द या पेट दर्द की शिकायत करना, भूख कम लगना या नींद का पैटर्न बिगड़ना डिप्रेशन के शारीरिक लक्षण हो सकते हैं।
  • पढ़ाई पर असर: अचानक स्कूल जाने से कतराना, ध्यान केंद्रित न कर पाना और ग्रेड्स का गिरना भी मानसिक पीड़ा की ओर इशारा करता है।
  • आत्मविश्वास की कमी: यदि बच्चा खुद को कमतर आंकने लगे या कहे कि “मुझे कोई पसंद नहीं करता” या “मैं अच्छा नहीं हूँ”, तो माता-पिता को इन बातों को कभी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

डिप्रेशन की वजह और इलाज

डॉक्टर के अनुसार, पारिवारिक तनाव, स्कूल में बुलिंग (Bullying), पढ़ाई का अत्यधिक दबाव या किसी प्रियजन को खोना बच्चों में अवसाद के मुख्य कारण हो सकते हैं। सबसे संवेदनशील आयु वर्ग 15 से 19 वर्ष का माना जाता है, लेकिन इससे छोटे बच्चे भी प्रभावित हो सकते हैं।

राहत की बात: डॉ. का कहना है कि डिप्रेशन लाइलाज नहीं है। यदि समय पर पहचान कर ली जाए और सही मेडिकल व मनोवैज्ञानिक मदद ली जाए, तो बच्चे पूरी तरह स्वस्थ होकर एक सामान्य और खुशहाल जीवन जी सकते हैं।

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