अजमेर। राजस्थान में प्रशासनिक और सिविल सेवा भर्तियों का जिम्मा संभालने वाले राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC), अजमेर के सर्वाेच्च मुखिया यानी अध्यक्ष पद को लेकर प्रदेश के सियासी और प्रशासनिक गलियारों में भारी सरगर्मी और हलचल शुरू हो गई है। विधिक पंचांग और सेवा नियमों के अनुसार, ठीक 10 दिन बाद यानी आगामी 19 जून 2026 को आयोग के वर्तमान स्थायी अध्यक्ष यू.आर. साहू (उत्कल रंजन साहू) का कार्यकाल पूर्ण रूप से समाप्त होने जा रहा है। साहू की विधिक सेवानिवृत्ति के बाद सूबे की भजनलाल सरकार के सामने सबसे बड़ी प्रशासनिक विवशता यह होगी कि उसे आयोग के कामकाज को सुचारू रखने के लिए तत्काल एक नए स्थायी अथवा कार्यवाहक (Acting) अध्यक्ष की तैनाती करनी होगी। यदि दोनों ही विधिक स्थितियों में समय पर अध्यक्ष की नियुक्ति की अधिसूचना जारी नहीं होती है, तो आयोग में स्थापित वरिष्ठता नियमावली के अनुसार ही दैनिक प्रशासनिक कामकाज आगे बढ़ाया जाएगा।
19 जून की डेडलाइन: क्यों खत्म हो रहा है यू.आर. साहू का कार्यकाल?
राजस्थान पुलिस के पूर्व महानिदेशक (DGP) रह चुके कड़क मिजाज आईपीएस अफसर उत्कल रंजन साहू को पिछले वर्ष राज्यपाल द्वारा आरपीएससी का पूर्णकालिक अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। विधिक सेवा नियमों के अनुसार, आरपीएससी के अध्यक्ष अथवा सदस्य अपने पद पर अधिकतम छह वर्ष अथवा 62 वर्ष की आयु पूरी होने तक (जो भी पहले हो) ही रह सकते हैं। 20 जून 1964 को जन्मे यू.आर. साहू 19 जून 2026 को अपनी आयु के 62 वर्ष विधिक रूप से पूरे कर रहे हैं, जिसके कारण उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है। उनके हटने के साथ ही आरपीएससी के सर्वाेच्च विधिक कक्ष का ताला नए अधिकारी के लिए खुलेगा, जिसके लिए लॉबिंग का दौर चरम पर है।
आरपीएससी का सांख्यिकीय और विधिक सफर: 1949 से 2026 तक
आयोग के संगठनात्मक ढांचे में पिछले कुछ दशकों में बड़ा विस्तार किया गया है, जिसका विधिक व सांख्यिकीय इतिहास और वर्तमान कोरम (विभागीय स्थिति) इस प्रकार है:
- स्थापना (वर्ष 1949): जब आयोग का गठन हुआ था, तब शुरुआती नियमों के तहत अध्यक्ष सहित कुल 5 सदस्य ही भर्तियों का विधिक संचालन करते थे।
- पहला विस्तार (वर्ष 2013): तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने कार्यभार बढ़ने का हवाला देते हुए सदस्यों की संख्या में 2 की बढ़ोतरी की, जिससे बोर्ड 7 सदस्यीय हुआ।
- दूसरा विस्तार (वर्ष 2024): वर्तमान भाजपा सरकार ने साल 2024 में एक बड़ा नीतिगत फैसला लेते हुए आयोग में 3 और सदस्यों की संख्या बढ़ा दी, जिसके बाद आरपीएससी अब 10 सदस्यीय विशाल विधिक निकाय बन चुका है।
आसन्न प्रशासनिक शून्य: अक्टूबर तक कम हो जाएंगे 3 और सदस्य, 3 पहले से ही खाली
आरपीएससी इस वक्त अपने इतिहास के सबसे बड़े ‘प्रशासनिक शून्य’ (Structural Crisis) की तरफ बढ़ रहा है। आयोग में वर्तमान में सदस्यों के तीन पद पहले से ही रिक्त चल रहे हैं, जो डॉ. संगीता आर्य और डॉ. मंजू शर्मा के इस्तीफे तथा वर्ष 2024 में वरिष्ठ सदस्य जसवंत राठी के आकस्मिक निधन के कारण खाली हुए थे। 19 जून को अध्यक्ष का पद रिक्त होने के बाद, आगामी चार महीनों के भीतर 3 और सदस्य विधिक रूप से रिटायर होने वाले हैं:
- 8 जुलाई 2026: सदस्य कैलाशचंद मीणा का कार्यकाल विधिक रूप से समाप्त हो जाएगा।
- 31 जुलाई 2026: सदस्य डॉ. अशोक कुमार कलवार अपनी विधिक आयु पूरी कर सेवानिवृत्त होंगे।
- 14 अक्टूबर 2026: सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा-2021 और व्याख्याता भर्ती पेपर लीक मामले में जेल में बंद और निलंबित चल रहे विवादित सदस्य बाबूलाल कटारा का आधिकारिक कार्यकाल भी 14 अक्टूबर को समाप्त हो जाएगा।
इन तीनों के हटने के बाद आयोग के 10 सदस्यीय बोर्ड में से महज चार सदस्य— प्रो. अयूब खान, लेफ्टिनेंट कर्नल केसरी सिंह, डॉ. सुशील कुमार बिस्सू और हेमंत प्रियदर्शी ही शेष रह जाएंगे।
कैसे होती है नियुक्ति और क्या हैं कड़े विधिक नियम?
आरपीएससी अध्यक्ष की कुर्सी इतनी रसूखदार है कि इस पद को पाने के लिए वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के अलावा विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलगुरु (Vice-Chancellors) और नामचीन शिक्षाविद् जयपुर से लेकर दिल्ली तक सियासी गलियारों में दौड़धूप कर रहे हैं। हालांकि, इस पद पर नियुक्ति की विधिक क्रोनोलॉजी बेहद जटिल है।
राज्य सरकार जब भी किसी नाम का पैनल तैयार करती है, तो नियुक्ति की अंतिम विधिक मुहर लगने से पहले संबंधित व्यक्ति के पूरे सेवाकाल का रिकॉर्ड खंगाला जाता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि देश की आंतरिक सुरक्षा और सैन्य एजेंसियों के साथ-साथ पुलिस इंटेलिजेंस से संबंधित उम्मीदवार के चाल-चलन और वित्तीय ईमानदारी की सीक्रेट क्लीयरेंस रिपोर्ट (Vigilance Report) ली जाती है। चूंकि हाल के वर्षों में आरपीएससी पेपर लीक और भ्रष्टाचार के आरोपों से बुरी तरह बदनाम हुआ है, इसलिए मुख्यमंत्री कार्यालय इस बार किसी बेदाग और बेहद कड़क प्रशासनिक पकड़ वाले चेहरे को ही अजमेर भेजने की विधिक तैयारी में है, ताकि प्रदेश के लाखों युवाओं का सरकारी परीक्षाओं और आरपीएससी की पारदर्शिता पर विधिक भरोसा फिर से बहाल किया जा सके।