अनुशासन से थमेगी धांधली: पूर्व सैन्य अधिकारियों को मिली भर्ती संस्थाओं की कमान, शुचिता बहाल करने की बड़ी चुनौती

Madhu Manjhi

जयपुर। प्रदेश में सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के भविष्य और भर्ती परीक्षाओं के सुरक्षित संचालन को लेकर एक नया और बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य की दोनों सबसे बड़ी भर्ती संस्थाओं के शीर्ष पदों की जिम्मेदारी अब भारतीय सेना से जुड़े रहे वरिष्ठ अधिकारियों के हाथों में आ गई है। जहां एक ओर कर्मचारी चयन बोर्ड के अध्यक्ष पद पर रिटायर्ड मेजर जनरल आलोक राज पहले से ही कार्यरत हैं, वहीं अब दूसरी बड़ी भर्ती एजेंसी की कमान कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में लेफ्टिनेंट कर्नल केसरी सिंह को सौंप दी गई है। सेना के इन दोनों अधिकारियों के पास पूर्व का लंबा प्रशासनिक और अनुशासनात्मक अनुभव है, जिसका फायदा अब भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाने में मिलने की उम्मीद है।

दो नए सदस्यों की नियुक्ति, शिक्षा जगत से जुड़े चेहरे शामिल

प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए भर्ती बोर्ड में दो नए सदस्यों को भी शामिल किया गया है। प्रोफेसर संतोष आनंद और डॉ. दीपक कुमार शर्मा की नियुक्ति के आदेश जारी किए गए हैं। संतोष आनंद पूर्व में भीलवाड़ा के एक प्रतिष्ठित कॉलेज के प्राचार्य रह चुके हैं और उनका शैक्षणिक क्षेत्र में लंबा अनुभव रहा है। वहीं, डॉ. दीपक कुमार शर्मा भी राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित शैक्षिक संगठनों में प्रांतीय संगठन मंत्री और प्रदेश अध्यक्ष जैसी महत्वपूर्ण सांगठनिक जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। इन नियुक्तियों से भर्ती बोर्ड की निर्णय लेने की क्षमता और कार्यों की गति में तेजी आने की संभावना है।

पेपर लीक के दौर में लिया गया था बड़ा फैसला

विगत कुछ समय में लगातार सामने आए पेपर लीक के मामलों ने प्रदेश के युवाओं के भरोसे को भारी ठेस पहुंचाई थी और व्यवस्था पर कई सवालिया निशान खड़े किए थे। इस छवि को सुधारने और परीक्षा तंत्र में कड़ा अनुशासन स्थापित करने के उद्देश्य से ही भर्ती एजेंसियों के सर्वोच्च पदों पर सैन्य पृष्ठभूमि के अधिकारियों को लाने का नीतिगत निर्णय लिया गया।

अगस्त 2023 में रिटायर्ड मेजर जनरल आलोक राज को कर्मचारी चयन बोर्ड की जिम्मेदारी दी गई थी, जिनके नेतृत्व में बोर्ड ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने कार्यकाल में करीब 130 परीक्षाओं का सफलतापूर्वक और पारदर्शिता के साथ आयोजन कराया। इसी तरह अक्टूबर 2023 में लेफ्टिनेंट कर्नल केसरी सिंह को सदस्य के तौर पर जोड़ा गया था, जो अब कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में मुख्य भूमिका में आ चुके हैं।

नए नेतृत्व के सामने अवसर और चुनौतियां दोनों

लेफ्टिनेंट कर्नल केसरी सिंह के लिए कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में यह नई भूमिका एक बड़ी परीक्षा की तरह है। वर्तमान नियमों के अनुसार, सदस्य के रूप में उनका कार्यकाल वर्ष 2029 तक सुरक्षित है। यदि उनके इस कार्यवाहक कार्यकाल के दौरान परीक्षाएं पूरी तरह समयबद्ध, पारदर्शी और बिना किसी विवाद के संपन्न होती हैं, तो उनके लिए स्थायी अध्यक्ष बनने की राह आसान हो सकती है।

हालांकि, उनके सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। पूर्व में उनकी नियुक्ति को लेकर कुछ विवाद और आलोचकों के सवाल भी सामने आए थे। ऐसे में अब यह उनके प्रशासनिक कौशल और कड़े फैसलों पर निर्भर करेगा कि वे परीक्षा प्रणाली में आधुनिक तकनीकी प्रयोगों को शामिल कर किस प्रकार आलोचकों को अपने काम से जवाब देते हैं।

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