तकनीकी सेंधमारी: झारखंड में कार्यरत सरकारी कर्मचारी निकला मास्टरमाइंड, साइबर पुलिस ने दौसा से किया गिरफ्तार

Madhu Manjhi

जयपुर। सरकारी भर्ती परीक्षाओं की प्रणाली और तकनीक में सुरक्षा को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक शातिर आरोपी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से कोडिंग तैयार कर भर्ती पोर्टल की सुरक्षा प्रणाली में न केवल सेंध लगाई, बल्कि परीक्षा में चयनित हुए अभ्यर्थियों के आवेदन ही विड्रॉ (हटा) कर दिए। पीड़ित अभ्यर्थी की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए साइबर अपराध थाना पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

एआई की मदद से सिस्टम को दिया चकमा

पुलिस जांच में सामने आया है कि 27 वर्षीय आरोपी ने किसी अत्याधुनिक सुरक्षा तंत्र को भेदने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा लिया। उसने एआई की मदद से विशेष कोडिंग तैयार की, जिसके जरिए वह पोर्टल के सिक्योरिटी बाईपास को तोड़ने में कामयाब रहा। इसके बाद उसने फर्जी एसएसओ (SSO) और जीमेल आईडी का जाल बुना। इस फर्जी पहचान के दम पर आरोपी ने सहायक खनिज अभियंता एवं खान-भू विज्ञान विभाग भर्ती परीक्षा-2024 की सूची में शामिल तीन अभ्यर्थियों के आवेदन को सिस्टम से पूरी तरह हटा दिया, जिससे उनका चयन खतरे में पड़ गया।

पीड़ित की शिकायत पर 12 जून को दर्ज हुआ मामला

इस पूरे मामले का भंडाफोड़ तब हुआ जब पीड़ित अभ्यर्थी रघुवीर गुर्जर ने गत 12 जून को साइबर पुलिस को एक लिखित शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित ने बताया कि उसके पास भर्ती से जुड़े क्रेडेंशियल्स में अनधिकृत बदलाव और आवेदन विड्रॉ होने के संदेश मिले थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस महानिरीक्षक और पुलिस अधीक्षक के कड़े निर्देशन में एक विशेष टीम का गठन किया गया। पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण, आईपी एड्रेस ट्रैकिंग और मुखबिरों से मिली सटीक जानकारी के आधार पर जाल बिछाकर आरोपी को धर दबोचा।

आरोपी का बैकग्राउंड और पुलिस की आगे की कार्रवाई

गिरफ्तार किया गया आरोपी मूल रूप से दौसा का रहने वाला है और वर्तमान में झारखंड में एक प्रतिष्ठित सार्वजनिक उपक्रम में कर्मचारी के रूप में कार्यरत है। इतनी अच्छी प्रोफाइल होने के बावजूद उसने इस साइबर अपराध को क्यों अंजाम दिया, इसकी कड़ियों को जोड़ा जा रहा है। साइबर थाना पुलिस अब इस बात की गहन जांच कर रही है कि क्या आरोपी ने इस साजिश को अकेले ही अंजाम दिया था या इस खेल के पीछे कोई बड़ा रैकेट काम कर रहा है। इसके साथ ही इस्तेमाल किए गए तकनीकी गैजेट्स और डेटा को भी फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।

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