जयपुर: राजस्थान में सरकारी नौकरियों के नाम पर फर्जी डिग्रियों और प्रमाणपत्रों का एक ऐसा मकड़जाल फैला हुआ है, जिसने पूरी व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने इस रैकेट के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू कर दी है। SOG की जांच में सामने आया है कि यह खेल केवल राजस्थान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई राज्यों के विश्वविद्यालय इस घोटाले के केंद्र बने हुए हैं।
परीक्षा धांधली, फर्जी डिग्री और नकली खेल प्रमाणपत्र के इस बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए SOG ने अब तक 100 से 150 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जिनमें फर्जी दस्तावेजों के दम पर सरकारी नौकरी पाने वाले अभ्यर्थी, दलाल और यूनिवर्सिटी प्रबंधन से जुड़े लोग शामिल हैं।
लाखों रुपये में बिक रही थीं ‘बैकडेट’ डिग्रियां
SOG की पिछले 5 वर्षों की कड़ियों को जोड़ने पर एक बेहद चौंकाने वाला तरीका (Modus Operandi) सामने आया है। दलाल और निजी विश्वविद्यालयों के कुछ भ्रष्ट अधिकारी मिलकर अभ्यर्थियों से लाखों रुपये ऐंठते थे। इसके बदले में उन्हें बिना कोई परीक्षा दिए, पुरानी तारीखों (Backdate) में डिग्रियां, मार्कशीट और यहाँ तक कि खेल प्रमाणपत्र (Sports Certificates) तक बनाकर दे दिए जाते थे। इन जाली दस्तावेजों को सरकारी विभागों के वेरिफिकेशन में असली बताकर पेश किया जाता था और अभ्यर्थी आसानी से सरकारी कुर्सियों पर काबिज हो रहे थे।
राजस्थान से MP और उत्तराखंड तक फैली जांच की आंच
SOG के रडार पर इस समय 25 से ज्यादा यूनिवर्सिटीज हैं। जांच की सुई जिन प्रमुख संस्थानों की तरफ घूम रही है, उनमें ये शामिल हैं:
- OPJS University (चूरू, राजस्थान): अप्रैल 2024 में SOG ने यहाँ एक बड़ा स्टिंग ऑपरेशन कर फर्जी डिग्री गैंग का पर्दाफाश किया था। मौके से 3 आरोपी गिरफ्तार हुए और 50 से अधिक संदिग्ध डिग्रियां जब्त की गईं। यहाँ खेल प्रमाणपत्रों का भी बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है।
- Mewar University (राजस्थान): फर्जी डिग्री प्रकरण में इस यूनिवर्सिटी के उच्च अधिकारियों की भूमिका की गहनता से जांच की जा रही है।
- Rabindranath Tagore University और Shri Sathya Sai University (मध्य प्रदेश): PTET भर्ती-2022 और PTI भर्ती परीक्षा के दौरान इन विश्वविद्यालयों से जारी की गईं संदिग्ध BEd और BPEd डिग्रियों के रिकॉर्ड SOG ने जब्त कर लिए हैं।
- अन्य रडार पर संस्थान: उत्तराखंड की हिमालयन गढ़वाल यूनिवर्सिटी, कलिंगा यूनिवर्सिटी, जेएस यूनिवर्सिटी और सिरलॉक्स यूनिवर्सिटी समेत कई अन्य राज्यों के शिक्षण संस्थान भी SOG की रडार पर हैं।
डमी कैंडिडेट से लेकर फॉरेन मेडिकल सर्टिफिकेट तक का खेल
SOG की पड़ताल में यह भी सामने आया कि इस नेटवर्क के तार केवल फर्जी डिग्री तक ही नहीं जुड़े हैं, बल्कि इन्होंने भर्ती परीक्षाओं का पूरा सिस्टम हैक कर रखा था।
- डमी कैंडिडेट का इस्तेमाल: कई मामलों में मुख्य अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देने के लिए ‘डमी कैंडिडेट’ (Fake Examinees) बिठाए गए। परीक्षा पास होने के बाद, नौकरी पक्की करने के लिए बैकडेट में फर्जी BSc की डिग्रियां लगा दी गईं।
- FMGE घोटाला (विदेशी मेडिकल डिग्री): विदेश से MBBS की पढ़ाई करने वाले कुछ छात्रों ने कथित तौर पर नकली प्रमाणपत्रों के सहारे भारत के मेडिकल क्षेत्र (FMGE) में प्रवेश हासिल कर लिया। SOG ने इस मामले में भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की है।
SOG की अगली नजर: और भी होंगे बड़े खुलासे
SOG अधिकारियों के मुताबिक, परीक्षा धांधली, डमी कैंडिडेट और फर्जी डिग्रियों का यह गठजोड़ बहुत गहरा है। अब जांच एजेंसी इस बात का पूरा डेटा तैयार कर रही है कि पिछले कुछ सालों में कुल कितने लोगों ने इन फर्जी कागजातों के सहारे सरकारी नौकरियां हासिल की हैं। जैसे-जैसे विश्वविद्यालयों के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं, शिक्षा जगत और प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा हुआ है। आने वाले दिनों में कुछ बड़े चेहरों और सरकारी कर्मचारियों की गिरफ्तारी की पूरी संभावना जताई जा रही है।