जयपुर। राजस्थान के चिकित्सा विभाग (अराजपत्रित) ने जीएनएम (GNM) कोर्स में प्रवेश के नाम पर निजी नर्सिंग संस्थानों द्वारा की जाने वाली मनमानी और अवैध वसूली पर इस बार बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। कॉलेजों की तरफ से खाली सीटों को लेकर बनाए जा रहे लगातार दबाव को देखते हुए विभाग ने उन्हें अपने स्तर पर सीटें भरने की ‘एक बारीय शिथिलता’ (छूट) तो दे दी है, लेकिन साथ ही एक ऐसा कड़ा राइडर (शर्त) लगा दिया है जिसने निजी संस्थान संचालकों की नींद उड़ा दी है।
विभाग के नए आदेश के मुताबिक, सत्र 2025-26 की काउंसलिंग के लिए जो स्टूडेंट्स पहले से ऑफिशियल जीएनएम पोर्टल पर रजिस्टर्ड हैं, केवल उन्हीं के जरिए इन खाली सीटों को भरा जा सकेगा। इस फैसले से उन कॉलेज प्रबंधकों के पसीने छूट रहे हैं, जिन्होंने पुराने पैटर्न के भरोसे अन-रजिस्टर्ड छात्रों से मोटी रकम (डोनेशन) लेकर सीटें एडवांस में ‘लॉक’ कर ली थीं।
चार काउंसलिंग के बाद भी आधी सीटें खाली, क्या है इसके पीछे का खेल?
विभाग ने इस सत्र में कुल 210 नर्सिंग संस्थानों की 11,030 सीटों के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे थे, जिसमें 40 हजार से अधिक छात्रों ने पंजीकरण कराया था। पूर्व के कड़वे अनुभवों को देखते हुए विभाग ने तीन से चार चरणों की काउंसलिंग आयोजित की और छात्रों को उनके स्थानीय स्तर के संस्थान आवंटित किए। इसके बावजूद आश्चर्यजनक रूप से केवल 50 फीसदी सीटों पर ही प्रवेश हुआ और 5,930 सीटें खाली रह गईं।
क्या है अजब-गजब फार्मूला? सूत्रों की मानें तो यह निजी संस्थानों की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा रहा है। साल 2022 तक 50% सीटें विभाग और 50% कॉलेज फेडरेशन भरता था। फेडरेशन कोटे में भारी डोनेशन की शिकायतों के बाद विभाग ने 2023-24 से शत-प्रतिशत सीटें काउंसलिंग से भरने का नियम बनाया। इसके बाद संस्थानों ने नई गली निकाली—वे काउंसलिंग में सीटें खाली रखवा देते हैं और जैसे ही विभाग से खुली छूट मिलती है, भारी ‘पेमेंट मोड’ पर सीटें फुल कर लेते हैं। इसी कारस्तानी को रोकने के लिए इस बार पैटर्न बदला गया है।
10 से 14 जून तक का समय, नियमों के उल्लंघन पर होगी कार्रवाई
निदेशक अराजपत्रित राकेश कुमार शर्मा द्वारा निजी नर्सिंग संस्थानों के प्राचार्यों को जारी गाइडलाइन के अनुसार, खाली सीटों को भरने के लिए 10 जून से 14 जून 2026 तक का समय दिया गया है।
प्रवेश के लिए मुख्य शर्तें इस प्रकार हैं:
- केवल दिसंबर 2025 तक 12वीं उत्तीर्ण छात्र ही प्रवेश के पात्र होंगे।
- प्रवेश पाने वाला अभ्यर्थी पूर्व में जीएनएम पोर्टल पर पंजीकृत होना अनिवार्य है।
- पंजीकृत अभ्यर्थी केवल एक ही संस्थान में प्रवेश के लिए योग्य माना जाएगा।
- यदि प्रवेश प्रक्रियाओं या नियमों में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पाई गई, तो संबंधित निजी संस्थान के खिलाफ नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी।
शर्त हटाने के लिए शुरू हुई भारी लॉबिंग
विभाग के इस फैसले के बाद अब उन कॉलेज संचालकों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है जिन्होंने बिना रजिस्ट्रेशन वाले छात्रों से मोटी फीस वसूल कर ली थी। अब स्थिति यह है कि यदि यह शर्त नहीं हटती है, तो उन्हें न केवल उन छात्रों की अवैध फीस लौटानी होगी, बल्कि पोर्टल पर पंजीकृत नए छात्र नहीं मिलने की स्थिति में उनकी सीटें भी खाली रह जाएंगी। यही वजह है कि अब इस सख्त शर्त को हटवाने के लिए रसूखदार संचालकों ने जयपुर में भारी लॉबिंग शुरू कर दी है।