सत्र के बीच माध्यम बदलने से छात्रों की पढ़ाई पर असर का डर: अभिभावकों ने की नए सत्र से बदलाव की मांग

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जयपुर: राजस्थान सरकार ने राज्य में संचालित महात्मा गांधी राजकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों की कार्यप्रणाली की समीक्षा शुरू कर दी है। जिन विद्यालयों में लंबे समय से विद्यार्थियों का नामांकन कम है, उन्हें वापस हिंदी माध्यम में परिवर्तित करने पर विचार किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के दायरे में राज्य के करीब 300 विद्यालय शामिल हैं।

क्या है शिक्षा विभाग का निर्देश?

माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) को निर्देश दिए हैं कि वे अगले 7 कार्य दिवसों के भीतर उन विद्यालयों का विस्तृत प्रस्ताव भेजें, जहाँ अंग्रेजी माध्यम के बजाय हिंदी माध्यम की आवश्यकता अधिक है। कोटा संभाग से भी ऐसे दो स्कूलों—कोटा जिले के इटावा और झालावाड़ जिले के पिड़ावा स्थित विद्यालय—को इस समीक्षा में शामिल किया गया है।

किन आधारों पर होगा निर्णय? शिक्षा विभाग ने रिपोर्ट तैयार करने के लिए कुछ स्पष्ट मापदंड निर्धारित किए हैं:

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  • नामांकन: विद्यालय का वर्तमान और पिछले वर्षों का कक्षावार नामांकन।
  • दूरी: आसपास स्थित हिंदी और अंग्रेजी माध्यम के अन्य विद्यालयों की दूरी।
  • संसाधन: विद्यालय में संचालित विषय और संकाय।
  • स्थानीय मांग: अभिभावकों की राय और हिंदी माध्यम की आवश्यकता का स्पष्ट कारण।

विभाग का स्पष्ट कहना है कि जिन स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम में पर्याप्त विद्यार्थी हैं और व्यवस्था सुचारू है, वहां किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाएगा

अभिभावकों और शिक्षकों की चिंता

चूंकि शैक्षणिक सत्र पहले ही मार्च में शुरू हो चुका है और विद्यार्थी अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई कर रहे हैं, इसलिए अभिभावकों में चिंता का माहौल है। अभिभावकों का तर्क है कि यदि माध्यम परिवर्तन आवश्यक ही है, तो इसे वर्तमान सत्र के बीच में लागू करने के बजाय आगामी नए सत्र से किया जाए ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। वहीं, अंग्रेजी माध्यम के शिक्षकों के सामने भी इस नई व्यवस्था के अनुरूप खुद को ढालने की चुनौती खड़ी होगी।

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