जयपुर: राजस्थान में छात्रसंघ चुनाव (Student Union Elections) को लेकर कानूनी लड़ाई एक बार फिर दिलचस्प हो गई है. राजस्थान हाई कोर्ट की खंडपीठ ने राजस्थान यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ चुनाव 2025-26 से जुड़े एकलपीठ के सामान्य निर्देशों पर अंतरिम रोक लगा दी है.
राज्य सरकार की विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सुदेश बंसल और जस्टिस मनीष शर्मा की बेंच ने यह आदेश जारी किया है. कोर्ट ने इस मामले में संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है. हाई कोर्ट ने एकलपीठ के 19 दिसंबर 2025 के आदेश के पैराग्राफ 45 से 58 तक दिए गए सभी दिशा-निर्देशों की क्रियान्विति पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है.
‘याचिका सिर्फ RU के लिए थी, निर्देश पूरे राज्य के लिए क्यों?’
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा कि प्राथमिक याचिका केवल राजस्थान यूनिवर्सिटी (RU) के छात्रसंघ चुनाव कराने तक ही सीमित थी. लेकिन, एकलपीठ ने अपने अधिकार क्षेत्र से आगे बढ़कर राज्य सरकार, विश्वविद्यालय प्रशासन और पूरी चुनाव प्रक्रिया के संबंध में व्यापक निर्देश दे दिए थे, जो मूल याचिका के दायरे से बाहर थे.
एकलपीठ ने क्या दिए थे निर्देश?
दिसंबर 2025 में एकलपीठ ने चुनावों के पारदर्शी संचालन और शैक्षणिक गतिविधियों को बाधित होने से बचाने के लिए कई कड़े सुझाव और निर्देश दिए थे:
- चुनाव कैलेंडर: हर शैक्षणिक सत्र के मार्च महीने में चुनाव का फिक्स कैलेंडर जारी किया जाए.
- इलेक्शन बोर्ड का गठन: चुनावों की निगरानी के लिए एक “स्टूडेंट यूनियन इलेक्शन बोर्ड” या विशेष समिति गठित की जाए.
- नियमों में सख्ती: एक बार चुनाव कैलेंडर जारी होने के बाद उसे बिना किसी ठोस या उचित कारण के बदला न जाए.
राज्य सरकार की दलीलें: महाधिवक्ता ने उठाए सवाल
राज्य सरकार की ओर से पैरवी करते हुए महाधिवक्ता (AG) राजेन्द्र प्रसाद ने एकलपीठ के आदेश को चुनौती दी. उन्होंने कोर्ट के सामने मुख्य रूप से तीन तर्क रखे:
1. दायरा लांघा गया: याचिका केवल एक यूनिवर्सिटी (RU) के चुनाव तक सीमित थी, लेकिन एकलपीठ ने व्यापक जनहित संबंधी निर्देश जारी कर दिए. अगर यह मामला व्यापक जनहित का था, तो इसे जनहित याचिका (PIL) के रूप में सुना जाना चाहिए था.
2. चुनाव आयोग को नहीं बनाया पक्षकार: चुनाव आयोग को इस मामले में पक्षकार बनाए बिना ही उसके लिए निर्देश जारी कर दिए गए, जो कानूनी रूप से उचित नहीं है.
3. 50 से अधिक यूनिवर्सिटीज पर असर: ये दिशा-निर्देश राजस्थान के 50 से अधिक विश्वविद्यालयों पर लागू होते हैं, जो कि मूल याचिका के दायरे से पूरी तरह बाहर हैं.
कोर्ट ने छात्रों से मांगा जवाब; छात्र संगठनों में बढ़ी हलचल
खंडपीठ ने सरकार के तर्कों को स्वीकार करते हुए एकलपीठ के निर्देशों पर अंतरिम रोक लगा दी है और याचिकाकर्ता छात्र जयराव व अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.
हाई कोर्ट के इस नए आदेश के बाद जहां एक तरफ छात्र संगठन नियमित और समय पर चुनाव कराने की मांग को लेकर लामबंद हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन अब इसके कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं की समीक्षा करने में जुट गए हैं. मामले की अगली सुनवाई पर अब सबकी नजरें टिकी हैं.