कर्तव्यनिष्ठा को मिला सम्मान: 10 साल पुराने अपहरण मामले में शानदार काम करने पर दौसा के चार पुलिसकर्मियों को मिलेगा पुरस्कार

Madhu Manjhi

राजस्थान पुलिस की सीआईडी (अपराध शाखा) ने कर्तव्यनिष्ठा और बेहतरीन अनुसंधान की मिसाल पेश करने वाली दौसा जिला पुलिस टीम के लिए एक बड़े नकद पुरस्कार की घोषणा की है। वर्ष 2016 में दर्ज हुए एक बेहद पेचीदा और लंबे समय से लंबित मामले का सफलतापूर्वक खुलासा करने वाली इस टीम की सराहना करते हुए विभाग ने वित्तीय प्रोत्साहन देने का निर्णय लिया है। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस, सीआईडी (अपराध) राजस्थान, जयपुर श्री बिपीन कुमार पांडेय द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, इस कामयाबी के लिए पुलिस टीम को कुल ₹25,000 की इनाम राशि वितरित की जाएगी।

टीम के इन चार अधिकारियों व कर्मचारियों को मिलेगा बराबर इनाम

सीआईडी मुख्यालय से जारी आदेश के मुताबिक, मानव तस्करी विरोधी यूनिट (AHTU) एवं पुलिस अधीक्षक कार्यालय, दौसा से जुड़े कुल चार पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को इस नकद पुरस्कार के लिए चुना गया है। मामले के खुलासे में सभी की बराबर और महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए प्रत्येक पुलिसकर्मी को ₹6,250 की नकद प्रोत्साहन राशि प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा।

सम्मानित होने वाले पुलिस अधिकारियों व जवानों की सूची इस प्रकार है:

  1. दीपक कुमार, प्रभारी एवं सहायक उपनिरीक्षक (ASI), मानव तस्करी विरोधी यूनिट, दौसा
  2. नवीन कुमार, हेड कांस्टेबल, एसटी-एससी सेल (ST-SC Cell), दौसा
  3. लक्ष्मीकांत, हेड कांस्टेबल, पुलिस उप अधीक्षक (DYSP) कार्यालय, दौसा
  4. भगवान सहाय, कांस्टेबल, एसटी-एससी सेल (ST-SC Cell), दौसा

क्या था पूरा मामला?

यह पूरा घटनाक्रम दौसा जिले के सदर थाना क्षेत्र में वर्ष 2016 के दौरान दर्ज हुए एक आपराधिक मामले से जुड़ा हुआ है। उस वक्त सदर थाने में भारतीय दंड संहिता (भादंसं) की धारा 365 (अपहरण या गुप्त रूप से बंधक बनाने के इरादे से किसी व्यक्ति को ले जाना) के तहत एफआईआर संख्या 145/2016 दर्ज की गई थी।

यह मामला शाहजानपुर (ग्राम व पोस्ट राहुवास, पुलिस थाना रामगढ़ पचवारा, जिला दौसा) के रहने वाले रामप्रताप मीणा के पुत्र सुरेश मीणा की गुमशुदगी और संभावित अपहरण से संबंधित था। सुरेश मीणा लंबे समय से लापता था और पुलिस के लिए उसे ढूंढना एक बड़ी चुनौती बना हुआ था।

उल्लेखनीय भूमिका निभाने पर मिला सम्मान

दौसा पुलिस की इस विशेष टीम ने तकनीकी इनपुट्स, मुखबिर तंत्र और पुराने कड़ियों को जोड़ते हुए गुमशुदा युवक सुरेश मीणा को सुरक्षित दस्तयाब (बरामद) करने में सफलता हासिल की। लंबे समय बाद इस अनसुलझे मामले के पटाक्षेप और युवक की सुरक्षित बरामदगी में इन चारों पुलिसकर्मियों ने अत्यंत उल्लेखनीय और सराहनीय भूमिका निभाई। पुलिस मुख्यालय के अनुसार, ऐसे पुरस्कारों से फील्ड में काम करने वाले जवानों का मनोबल बढ़ता है और वे गंभीर मामलों के निस्तारण के लिए अधिक ऊर्जा के साथ काम करते हैं।

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