राजस्थान में सरकारी भर्तियों में सेंध लगाने वाले गिरोह के खिलाफ स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) ने अपनी स्ट्राइक तेज कर दी है। SOG ने कनिष्ठ अभियंता (जेईएन) संयुक्त भर्ती परीक्षा-2020 के पेपर लीक मामले में मुख्य आरोपी भीम सिंह (46, निवासी अलवर) को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। आरोपी इतना शातिर था कि उसने पुलिस की तकनीकी ट्रैकिंग से बचने के लिए मोबाइल फोन का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर दिया था।
‘डिजिटल पाठशाला’ और टैबलेट का खेल
SOG एडीजी विशाल बंसल के अनुसार, भीम सिंह मोबाइल के बजाय अभ्यर्थियों को टैबलेट और आईपैड पर पेपर रटवाता था, जिसे वह अपनी ‘डिजिटल पाठशाला’ कहता था। वह प्रत्येक अभ्यर्थी से 25 से 30 लाख रुपए वसूलता था। गिरफ्तारी के डर से उसने अपना अपराध में इस्तेमाल किया गया टैबलेट अपनी बेटी के ससुराल में छिपा दिया था, जिसे SOG ने बरामद कर लिया है।
इन बड़ी भर्तियों में लगाई सेंध
भीम सिंह कुख्यात पेपर लीक माफिया भूपेंद्र सारण का करीबी साथी है और अलवर-भरतपुर क्षेत्र में अपना गिरोह चलाता था। जांच में सामने आया है कि वह केवल JEN भर्ती ही नहीं, बल्कि कई अन्य बड़ी परीक्षाओं के पेपर भी लीक कर चुका है:
- JEN भर्ती-2020 (दिसंबर और सितंबर 2021 पुनः परीक्षा)
- CHO भर्ती-2020
- राजस्थान पुलिस कांस्टेबल भर्ती-2022
- हाईकोर्ट LDC भर्ती परीक्षा
कोचिंग और कंप्यूटर लैब बने ‘लीक सेंटर’
आरोपी भीम सिंह और सरगना भूपेंद्र सारण पहले रेलवे सुरक्षा बल (RPF) में साथ काम कर चुके हैं। 2018 में इस्तीफा देने के बाद भीम सिंह ने बानसूर में कोचिंग और जयपुर में कंप्यूटर लैब खोली, जिसका इस्तेमाल उसने लीक सेंटर के रूप में किया। गिरोह ने अभ्यर्थियों को जयपुर में इकट्ठा कर टैबलेट के जरिए पेपर दिखाकर परीक्षा केंद्रों तक पहुँचाया था।
विशेष अपडेट: कांस्टेबल भर्ती-2018 आरोपी को राहत नहीं
एक अन्य महत्वपूर्ण मामले में, राजस्थान हाईकोर्ट ने कांस्टेबल भर्ती-2018 पेपर लीक के आरोपी कमल कुमार वर्मा की जमानत याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस प्रमिल कुमार माथुर ने स्पष्ट किया कि यह एक संगठित अपराध है और सीसीटीवी फुटेज जैसे साक्ष्यों से आरोपी की लिप्तता साबित हो रही है। महज लंबे समय से जेल में होने के आधार पर आरोपी को जमानत नहीं दी जा सकती।