भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने बुधवार को राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (RSRTC) के दौसा आगार में बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। एसीबी की टीम ने मुख्य प्रबंधक विश्राम मीणा को 20,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई एसीबी मुख्यालय के निर्देश पर अलवर प्रथम की टीम द्वारा की गई।
मेडिकल लीव के बदले मांगी थी रिश्वत
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के महानिदेशक पुलिस गोविंद गुप्ता के अनुसार, यह मामला एक कर्मचारी की मेडिकल लीव (चिकित्सा अवकाश) को स्वीकृत करने से जुड़ा है। परिवादी दिसंबर 2025 में बीमार होने के कारण छुट्टी पर गया था। जनवरी 2026 में जब वह ड्यूटी पर वापस लौटा, तो उसने अपने इलाज से संबंधित सभी मेडिकल सर्टिफिकेट और दस्तावेज कार्यालय के एलडीसी (LDC) भगवत को सौंप दिए थे।
जब परिवादी 25 मार्च को अपनी मेडिकल लीव अप्रूव कराने के लिए मुख्य प्रबंधक विश्राम मीणा के पास पहुँचा, तो मीणा ने इसके बदले 20,000 रुपये की मांग की और उसे परेशान करना शुरू कर दिया।
ACB ने बिछाया जाल
रिश्वत की मांग से परेशान होकर परिवादी ने एसीबी की हेल्पलाइन नंबर 1064 पर अपनी शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद एसीबी की टीम ने गोपनीय तरीके से जांच शुरू की:
- 2 अप्रैल और 7 अप्रैल: एसीबी ने रिश्वत की मांग का सत्यापन (Verification) किया, जिसमें रिश्वत मांगे जाने की पुष्टि हुई।
- 8 अप्रैल (बुधवार): सत्यापन के बाद योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया गया और जैसे ही विश्राम मीणा ने परिवादी से 20,000 रुपये लिए, एसीबी की टीम ने उसे रंगे हाथों दबोच लिया।
जांच जारी
एसीबी की टीम फिलहाल आरोपी मुख्य प्रबंधक विश्राम मीणा से पूछताछ कर रही है। उनके कार्यालय और आवास की भी तलाशी ली जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या वह अन्य भ्रष्टाचार के मामलों में भी संलिप्त था। विभाग में इस कार्रवाई के बाद से हड़कंप मचा हुआ है।