राजस्थान के सहकारिता विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के लिए शासन सचिव डॉ. समित शर्मा ने सोमवार को एक बड़ी नजीर पेश की है। शासन सचिवालय स्थित राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन 181 के औचक निरीक्षण के दौरान डॉ. शर्मा ने न केवल व्यवस्थाओं को जांचा, बल्कि खुद हेडफोन लगाकर करीब एक दर्जन परिवादियों से सीधा संवाद किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पोर्टल पर दर्ज शिकायतों का निस्तारण केवल कागजों या औपचारिक जवाबों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि धरातल पर पीड़ित को व्यावहारिक समाधान मिलना चाहिए ताकि आमजन का सहकारिता तंत्र पर विश्वास अटूट बना रहे।
निरीक्षण के दौरान सबसे कड़ी कार्रवाई अलवर जिले की महाराजावास ग्राम सेवा सहकारी समिति (PACS) के मामले में देखने को मिली। यहाँ के एक परिवादी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि समिति के व्यवस्थापक अभय यादव द्वारा स्वीकृत अल्पकालीन फसली ऋण की पूरी राशि उसे उपलब्ध नहीं कराई गई और बीच में ही बंदरबांट की गई। मामले की गंभीरता और प्रारंभिक जांच में शिकायत सही पाए जाने पर शासन सचिव ने तत्काल प्रभाव से व्यवस्थापक अभय यादव को निलंबित करने के निर्देश जारी किए। इसके साथ ही, राजस्थान सहकारी अधिनियम की धारा-55 के तहत मामले की विस्तृत जांच के आदेश देते हुए 7 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

इसी क्रम में अजमेर जिले से जुड़ी एक और चौंकाने वाली शिकायत सामने आई, जहाँ सुरेंद्र नामक किसान ने बताया कि उन्हें पिछले 5 वर्षों से लगातार फसली ऋण के लिए चक्कर लगवाए जा रहे हैं और ऋण उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। शासन सचिव ने इस भारी देरी पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की और संबंधित अधिकारियों को मामले का निस्तारण उसी दिन करने के निर्देश दिए। साथ ही, इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कार्मिकों और अधिकारियों को चिन्हित कर उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करने का आदेश दिया गया है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि 5 साल तक शिकायत लंबित क्यों रही।
सहकारिता विभाग के कामकाज की समीक्षा करते हुए डॉ. शर्मा ने बताया कि राजस्थान संपर्क पोर्टल विभाग के लिए एक प्रभावी हथियार साबित हो रहा है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में विभाग से संबंधित कुल 1,22,779 प्रकरण दर्ज हुए, जिनमें से 1,18,340 प्रकरणों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया जा चुका है। विभाग की समाधान दर इस समय लगभग 96 प्रतिशत है और शिकायतों को सुलझाने में औसतन 13 दिनों का समय लग रहा है। शासन सचिव ने इस गति को और सुधारने तथा शत-प्रतिशत गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के निर्देश दिए हैं।
निरीक्षण के अंतिम चरण में डॉ. समित शर्मा ने अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी कि जनता के हक, विशेषकर किसानों के फसली ऋण के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि शिकायतों के निस्तारण में देरी भ्रष्टाचार और संवेदनहीनता का संकेत है, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस दौरान एपेक्स बैंक के एमडी सौरभ स्वामी और सहकारिता विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे, जिन्हें विभागीय कार्यप्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और ऑनलाइन ट्रैक करने के लिए जरूरी बदलाव करने को कहा गया है।