जेजेएम घोटाले में बड़ी कार्रवाई: सेवानिवृत्त आईएएस सुबोध अग्रवाल दिल्ली से गिरफ्तार; ₹20,000 करोड़ का भ्रष्टाचार बेनकाब

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राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने आज जल जीवन मिशन (JJM) में हुए हजारों करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार मामले में एक ऐतिहासिक कार्रवाई को अंजाम दिया है। भ्रष्टाचार के मामले में रसूख रखने वाले सेवानिवृत्त आईएएस और तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव (PHED) सुबोध अग्रवाल को आज दिल्ली से हिरासत में लेकर गिरफ्तार कर लिया गया है

कैसे हुआ ₹20,000 करोड़ का महा-घोटाला?

प्रकरण संख्या 245/2024 की जांच में भ्रष्टाचार के ऐसे तरीके सामने आए हैं, जिन्होंने सिस्टम की जड़ों को हिला दिया है:

  • फर्जी प्रमाण पत्रों का खेल: मैसर्स श्री गणपति ट्यूबवैल कम्पनी (प्रोपराईटर महेश मित्तल) और मैसर्स श्री श्याम ट्यूबवैल कम्पनी (प्रोपराईटर पदमचन्द जैन) ने इरकॉन इन्टरनेशनल लि. (IRCON) के फर्जी कार्यपूर्णता प्रमाण पत्र तैयार किए ।
  • करोड़ों के टेंडर: इन फर्जी दस्तावेजों और विभाग के उच्चाधिकारियों की मिलीभगत से करीब ₹960 करोड़ के टेंडर हासिल किए गए ।
  • टेंडर पुलिंग और 40% एक्स्ट्रा प्रीमियम: सुबोध अग्रवाल और अन्य अधिकारियों ने आपराधिक मंशा से ₹50 करोड़ से ऊपर के मेजर प्रोजेक्ट्स में ‘साइट विजिट प्रमाण-पत्र’ की बाध्यता जोड़ दी । इससे बोली दाताओं की पहचान उजागर हो गई और ‘टेंडर पुलिंग’ के जरिए 30 से 40 प्रतिशत तक ऊंचे टेंडर प्रीमियम प्राप्त किए गए ।
  • कुल घोटाला: इन सभी संदिग्ध टेंडरों की कुल राशि लगभग ₹20,000 करोड़ आंकी गई है ।

अब तक 10 गिरफ्तार, 3 फरार अपराधियों की संपत्ति होगी कुर्क

एसीबी ने इस मामले में पहले ही 10 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है, जिनमें मुख्य अभियंता दिनेश गोयल, के.डी. गुप्ता, सुभांशु दीक्षित, और अन्य उच्चाधिकारी शामिल हैं

भगोड़ों पर कसा शिकंजा: प्रकरण में अभी भी तीन आरोपी—मुकेश गोयल (तत्कालीन अधीक्षण अभियंता), जितेन्द्र शर्मा (तत्कालीन अधिशाषी अभियंता), और संजीव गुप्ता (प्राइवेट व्यक्ति)—फरार हैं । माननीय न्यायालय ने इनके खिलाफ स्थायी वारंट जारी किए हैं और इन्हें ‘उद्घोषित अपराधी’ घोषित करवाकर इनकी सम्पत्ति कुर्की की कार्रवाई की जा रही है

अनुसंधान की कमान: एसआईटी की पैनी नज़र

इस पूरे ऑपरेशन और त्वरित अनुसंधान को अतिरिक्त महानिदेशक स्मिता श्रीवास्तव के सुपरविजन में अंजाम दिया जा रहा है । उप महानिरीक्षक पुलिस डॉ. रामेश्वर सिंह एवं ओमप्रकाश मीणा के निर्देशन में गठित एसआईटी तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों का गहन विश्लेषण कर रही है ।

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