देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET की शुचिता पर एक बार फिर ‘पेपर लीक’ का काला साया गहरा गया है। राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की पड़ताल में एक ऐसा सच सामने आया है जिसने लाखों परीक्षार्थियों के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है। जांच के अनुसार, 3 मई को आयोजित परीक्षा से दो दिन पहले ही सीकर में एक ‘क्वेश्चन बैंक’ व्हाट्सएप के जरिए वायरल हो गया था, जिसमें मौजूद 150 सवाल असली पेपर में हूबहू (Word-to-Word) आए।
केरल से चूरू और फिर व्हाट्सएप का ‘खूनी जाल’
SOG की जांच की कड़ियाँ अब केरल तक पहुँच गई हैं। लीक का पूरा घटनाक्रम किसी थ्रिलर फिल्म की तरह है:
- मुख्य कड़ी: चूरू का एक युवक, जो केरल के एक मेडिकल कॉलेज से MBBS कर रहा है, इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।
- तारीख: 1 मई को उसने यह ‘क्वेश्चन बैंक’ सीकर में अपने एक दोस्त को भेजा।
- व्हाट्सएप का विस्फोट: वहां से यह डेटा एक पीजी (PG) संचालक के पास पहुँचा, जिसने इसे अपने छात्रों और करियर काउंसलर्स को बांट दिया। मैसेज पर ‘Forwarded Many Times’ का टैग सबूत है कि यह हजारों छात्रों तक पहुँचा।
लीक का गणित: जब संयोग नहीं, ‘साजिश’ बोलती है
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी गेस पेपर से 5-10 सवाल मिलना सामान्य है, लेकिन नीट जैसी परीक्षा में यह आंकड़ा असंभव है:
| विवरण | सांख्यिकी |
| क्वेश्चन बैंक में कुल सवाल | 300+ (एक ही हैंडराइटिंग में) |
| असली पेपर में आए हूबहू सवाल | 150 प्रश्न |
| प्रति प्रश्न अंक | 4 |
| लीक हुए कुल अंक | 600 / 720 |
एक्सपर्ट कमेंट: “720 में से 600 नंबर के सवाल परीक्षा से दो दिन पहले ही हाथ से लिखकर बांट दिए गए। यह देश की सबसे बड़ी प्रतिस्पर्धा वाली परीक्षा के साथ एक क्रूर मजाक है, जहाँ 1 नंबर से हजारों रैंक बदल जाती हैं।”
व्हाट्सएप पर ‘Forwarded many times’ बना सबसे बड़ा सबूत
SOG को जांच में पता चला है कि यह क्वेश्चन बैंक न केवल व्हाट्सएप, बल्कि अन्य एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड एप्स के जरिए भी फैलाया गया। डिजिटल फुटप्रिंट्स मिटाने की कोशिश की गई, लेकिन ‘फॉरवर्डेड’ टैग ने पोल खोल दी। आशंका है कि हजारों प्रिंटआउट्स निकालकर भी इसे गुपचुप तरीके से छात्रों के बीच बांटा गया।
विशिलब्लोअर ही रडार पर: खुद को बचाने के लिए रची शिकायत की कहानी?
इस मामले में सबसे बड़ा ट्विस्ट सीकर के उस पीजी संचालक को लेकर है जिसने खुद एनटीए (NTA) और पुलिस को शिकायत दी थी। SOG के अनुसार:
- जांच में पुष्टि हुई है कि शिकायत देने से पहले यह क्वेश्चन बैंक उसी के फोन में आया था और उसने भी इसे आगे फॉरवर्ड किया था।
- एजेंसी का मानना है कि जब जाल बिछता दिखा, तो खुद को बचाने के लिए उसने ‘ईमानदार शिकायतकर्ता’ बनने का ढोंग रचा। अब वह शख्स भी SOG की गिरफ्त में है।