फर्जीवाड़े का खुलासा: LDC भर्ती का रिकॉर्ड गायब; 145 को फर्जी कागजों से दे दी नियुक्ति

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कनिष्ठ लिपिक भर्ती-2013 मामले में जिला कलेक्टर के निर्देश पर गठित जांच कमेटी की अंतरिम रिपोर्ट ने एक बड़े भर्ती घोटाले की परतें खोल दी हैं। तत्कालीन एडीएम (तृतीय) कुंतल विश्नोई की अध्यक्षता वाली कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि 627 अभ्यर्थियों की जांच के दौरान 145 नियुक्तियां पूरी तरह फर्जी और संदिग्ध पाई गई हैं।

सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी वर्ष 2013 से 2019 तक की नोटशीट, रोस्टर रजिस्टर और मेरिट लिस्ट जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज जिला परिषद के रिकॉर्ड से गायब हैं। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि संबंधित कार्मिकों और अधिकारियों ने जानबूझकर रिकॉर्ड को नष्ट किया या छिपाया है।

जांच कमेटी के रडार पर ‘सिस्टम’ के नुमाइंदे

जांच रिपोर्ट में भर्ती शाखा के डीलिंग बाबुओं और प्रभारी अधिकारियों की भूमिका को संदिग्ध माना गया है। रिपोर्ट तैयार करने वाली टीम में बृजमोहन गुप्ता (ACE0), ईश्वर सिंह (XEN), जय श्री जांगिड (लेखाधिकारी) और मनोज भारती (संस्थापन) शामिल थे। जांच में सामने आया कि सीईओ और एसीईओ स्तर से भी कई महत्वपूर्ण फाइलें जांच अधिकारी को उपलब्ध नहीं कराई गईं।


फर्जीवाड़े के 8 बड़े तरीके: कैसे हुआ ‘खेल’?

जांच कमेटी ने घोटाले के तौर-तरीकों को विस्तार से समझाया है:

  1. दोहरा ‘चमत्कार’: दर्जनों अभ्यर्थियों ने एक ही समय में राजस्थान में संविदा पर नौकरी करने का अनुभव दिखाया और उसी समय दूसरे राज्यों से नियमित डिग्री हासिल करने का दावा किया।
  2. बोनस अंकों की रेवड़ी: अपात्र होने के बावजूद कई चहेतों को 10 से 30 बोनस अंक दे दिए गए।
  3. अवैध डिग्रियां: मेघालय, सिक्किम, एमपी और तमिलनाडु की उन ‘ऑफ-कैंपस’ डिग्रियों को मान्य कर लिया गया, जिन्हें सरकार पहले ही अवैध घोषित कर चुकी थी।
  4. फर्जी RS-CIT: कई अभ्यर्थियों के कंप्यूटर सर्टिफिकेट का रिकॉर्ड वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय (VMOU) में मिला ही नहीं।
  5. कोटा उल्लंघन: एक्स-सर्विसमैन, दिव्यांग और आयु सीमा के नियमों को ताक पर रखकर नियुक्तियां दी गईं।
  6. संदिग्ध मेडिकल और हलफनामे: महिला अभ्यर्थियों के शपथ पत्रों से बाल विवाह की पुष्टि हुई और संदिग्ध मेडिकल सर्टिफिकेट के आधार पर ज्वाइनिंग दे दी गई।

पंचायत समिति वार संदिग्ध फाइलों का विवरण

विभिन्न पंचायत समितियों से प्राप्त फाइलों की स्थिति इस प्रकार है:

पंचायत समितिसंदिग्ध फाइलेंपंचायत समितिसंदिग्ध फाइलें
गोविंदगढ़51कोटपूतली37
जमवारामगढ़35शाहपुरा35
सांगानेर32बस्सी30
पावटा30झोटवाड़ा29
चाकसू27विराटनगर26
किशनगढ़-रेनवाल26मौजमाबाद25
जोबनेर25सांभरलेक24
तूंगा23कोटखावदा23
आमेर21दूदू20

ACB की कार्रवाई पर ‘ब्रेक’

इस पूरे प्रकरण में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत विभागीय अनुमति न मिलने के कारण एसीबी (ACB) की कार्रवाई अटकी हुई है। जांच कमेटी ने नितेश टाटीवाल, मुकेश शर्मा, संदीप वर्मा, रुपेंदर सिंह, नरेन्द्र यादव और हरीश वर्मा के खिलाफ सख्त कार्रवाई की सिफारिश की है, लेकिन फाइलें अभी भी अनुमति के इंतजार में दबी हुई हैं।

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