राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने प्रतापगढ़ जिले के धरियावद आबकारी थाने में तैनात प्रहराधिकारी (PO) ईश्वर सिंह के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है । आरोपी अधिकारी पर आरोप है कि उसने परिवादी से घरेलू उपयोग के लिए निकाली जाने वाली महुआ शराब के बदले ₹3000 की ‘मासिक बंधी’ (रिश्वत) की मांग की थी ।
मामले का विवरण
शिकायतकर्ता गौतम लाल, निवासी केसरियावाद, जिला प्रतापगढ़ ने एसीबी को दी अपनी रिपोर्ट में बताया कि वह अपने परिवार के उपभोग के लिए कभी-कभी महुआ की शराब निकालता है । इसे लेकर धरियावद आबकारी थाने के अधिकारी ईश्वर सिंह उससे ₹3000 प्रति माह रिश्वत की मांग कर रहे थे । शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि जमादार उंकार लाल ₹2500 की मांग कर रहा था, जिसमें से राशि का बँटवारा अन्य स्टाफ के बीच होना बताया गया था ।
एसीबी का सत्यापन और ट्रेप की कोशिश
एसीबी द्वारा 2 जनवरी 2026 को शिकायत का सत्यापन किया गया, जिसमें रिश्वत की मांग की पुष्टि हुई । सत्यापन के दौरान यह पाया गया कि आरोपी ईश्वर सिंह ने ₹2000 पूर्व में ही प्राप्त कर लिए थे और शेष ₹1000 की मांग जारी रखी थी ।
6 जनवरी 2026 को एसीबी टीम ने धरियावद में जाल बिछाया । जब परिवादी रिश्वत की शेष राशि देने आबकारी थाने पहुँचा, तो अधिकारियों को एसीबी की कार्रवाई की भनक लग गई । एफआईआर के अनुसार, आरोपी ईश्वर सिंह चड्डी-बनियान में हाथ में लठ लेकर बाहर आया और परिवादी को गाली-गलौज करते हुए मारने की धमकी देकर वहां से भगा दिया ।
सूचना लीक होने का संदेह
परिवादी ने अपनी रिपोर्ट में संदेह जताया है कि उसके चचेरे भाई हरिराम चौधरी, जिसका अंग्रेजी शराब का ठेका है, ने आबकारी विभाग के कर्मचारियों को एसीबी की इस गुप्त कार्रवाई की जानकारी दे दी थी । इसी कारण ट्रेप की कार्रवाई उस समय सफल नहीं हो सकी ।
कानूनी कार्यवाही
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने कॉल रिकॉर्डिंग, डिजिटल साक्ष्यों और सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर आरोपी ईश्वर सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत अपराध प्रमाणित पाया है । इस मामले की जांच अब उप पुलिस अधीक्षक, एसीबी बांसवाड़ा, ऋषिकेश मीणा को सौंपी गई है ।
एसीबी के उप महानिरीक्षक अनिल कयाल द्वारा इस प्राथमिकी को अंतिम रूप दिया गया है ।