टवारी के फर्जी दस्तखत कर माइनिंग लीज डकारने के 11 साल पुराने महा-फर्जीवाड़े में जेईएन मनीष पंवार समेत 8 पर चालान पेश

Madhu Manjhi

भीलवाड़ा। प्रदेश के कपड़ा उद्योग और खनिज हब के रूप में विख्यात भीलवाड़ा जिले से भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की एक बहुत बड़ी विधिक और प्रशासनिक कार्रवाई की खबर सामने आई है। भीलवाड़ा एसीबी प्रथम इकाई ने राजस्व विभाग के पटवारी के कूटरचित व फर्जी हस्ताक्षर (Forged Signatures) कर करोड़ों रुपये की माइनिंग लीज (खनन पट्टा) जारी कराने के करीब 11 साल पुराने एक बेहद पेचीदा और गंभीर मामले में अपनी विधिक जांच पूर्ण करते हुए न्यायालय में अंतिम आरोप पत्र (चालान) पेश कर दिया है। एसीबी ने इस पूरे सिंडिकेट के मुख्य सूत्रधार रहे खनिज विभाग के तत्कालीन फोरमैन और वर्तमान में भूजल वैज्ञानिक कार्यालय जोधपुर में तैनात कनिष्ठ अभियंता (JEN) मनीष पंवार सहित कुल 8 रसूखदार आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक मामलात न्यायालय (ACB Court) में विधिक चालान पेश किया है।

इस हाई-प्रोफाइल कार्रवाई से खनन लॉबी और विभागीय अधिकारियों के बीच हड़कंप मच गया है।

वर्ष 2012 के आसींद पांडरू खनन आवेदन से जुड़ा है पूरा विधिक नेक्सस

इस पूरे फर्जीवाड़े की स्क्रिप्ट वर्ष 2012 में भीलवाड़ा के आसींद क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पांडरू गांव में माइनिंग लीज के लिए दिए गए आवेदनों से लिखी गई थी। एसीबी के पुलिस उपाधीक्षक (DSP) पारसमल ने बताया कि ब्यूरो ने लंबी विधिक जांच के बाद वर्ष 2015 में इस संबंध में तीन अलग-अलग आपराधिक प्रकरण दर्ज किए थे:

  • एफआईआर संख्या-386: इस मामले में वर्तमान में राजस्थान उच्च न्यायालय (High Court) की विधिक रोक (Stay) प्रभावी है।
  • एफआईआर संख्या-387 व 388: इन दोनों प्रकरणों में एसीबी ने सघन फॉरेंसिक जांच के बाद 3 जून 2026 को न्यायालय के समक्ष चालान पेश करने की विधिक प्रक्रिया पूर्ण की है।

दो बड़ी फर्में और साझेदारों के आपराधिक सिंडिकेट का वर्गीकरण

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की केस डायरी के अनुसार, जिन दो खनन कंपनियों को अवैध रूप से लाभ पहुंचाने के लिए सरकारी दस्तावेजों में विधिक हेरफेर किया गया, उनके नामजद आरोपियों का विवरण इस प्रकार सांख्यिकीय रूप से वर्गीकृत है:

1. मेसर्स अंजनी माइनकेम (एफआईआर संख्या-387)

  • विधिक स्टेटस: इस फर्म ने वर्ष 2012 में पांडरू में लीज के लिए आवेदन किया था।
  • नामजद आरोपी: एसीबी ने जांच के बाद आशा मेहता, शीला मेहता, सुमित्रा देवी खोईवाल, दलाल संजय मेहता और तत्कालीन फोरमैन मनीष पंवार को प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए कोर्ट की विधिक रडार पर लिया है।

2. मेसर्स भोले माइंस एंड मिनरल्स (एफआईआर संख्या-388)

  • विधिक स्टेटस: आसींद के पांडरू क्षेत्र में ही इस फर्म द्वारा भी भारी खनन पट्टे के लिए आवेदन किया गया था।
  • नामजद आरोपी: इस प्रकरण में मुख्य सरगना मनीष पंवार के साथ ही संजय मेहता, रतनलाल व मुकेश खोईवाल को सह-आरोपी बनाते हुए विधिक चालान का हिस्सा बनाया गया है।

पटवारी ने किया इंकार, तो फोरमैन ने खुद ही चला दी फर्जी पेन: FSL ने की पुष्टि

इस पूरे घपले की इनसाइड स्टोरी बेहद चौंकाने वाली है। वर्ष 2014 में खनिज विभाग ने प्रस्तावित खनन क्षेत्र का सीमांकन (Demarcation) कर ग्राउंड मौका रिपोर्ट तैयार करने का विधिक जिम्मा तत्कालीन फोरमैन मनीष पंवार को सौंपा था। 6 मार्च 2014 को पंवार ने मौके पर जाकर तकनीकी रिपोर्ट तो तैयार की, लेकिन जब वह विधिक सत्यापन के लिए तत्कालीन पटवारी नरेशनाथ के पास पहुंचा, तो पटवारी ने वास्तविक मौके और सरकारी राजस्व रिकॉर्ड (Revenue Records) में भारी भिन्नता पाते हुए रिपोर्ट पर अपने आधिकारिक हस्ताक्षर करने से सरेआम मना कर दिया।

पटवारी के इंकार के बाद खनन माफिया के रसूख के दबाव में फोरमैन मनीष पंवार और दलालों ने मिलकर एक खौफनाक विधिक साजिश रची। उन्होंने पटवारी नरेशनाथ के हूबहू जाली और फर्जी हस्ताक्षर मौका रिपोर्ट पर अंकित कर दिए और विभाग से माइनिंग लीज के लिए एलओआई (Letter of Intent) जारी करवा ली। कुछ समय बाद जब पटवारी नरेशनाथ को भनक लगी कि उनकी बिना विधिक सहमति के मौका रिपोर्ट न केवल जारी हो चुकी है, बल्कि माइंस का आवंटन भी अंतिम चरण में है, तो उन्होंने तुरंत तहसीलदार को लिखित शिकायत भेजी। बाद में जब मामला एसीबी तक पहुंचा, तो राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) की हैंडराइटिंग एक्सपर्ट विंग ने अपनी विधिक व फॉरेंसिक रिपोर्ट में यह सौ प्रतिशत तस्दीक कर दिया कि मौका रिपोर्ट पर किए गए पटवारी के हस्ताक्षर पूरी तरह फर्जी और कूट रचित थे।

मुख्य आरोपी कनिष्ठ अभियंता जेल में; तीन अन्य कर्मचारियों पर लटकी विधिक तलवार

एसीबी भीलवाड़ा के पुलिस उपाधीक्षक पारसमल ने बताया कि इस सिंडिकेट के मुख्य सूत्रधार तत्कालीन फोरमैन और मौजूदा कनिष्ठ अभियंता मनीष पंवार को ब्यूरो की टीम ने 28 अक्टूबर 2025 को ही जोधपुर से विधिक रूप से गिरफ्तार कर लिया था, जो वर्तमान में न्यायिक अभिरक्षा में है।

इसके साथ ही, एसीबी की जांच में खनिज विभाग के तीन अन्य कर्मचारियों— अजय मेहता, प्रहलाद सिंह और सोहन लाल की भी इस भारी भ्रष्टाचार और जालसाजी में सीधी संलिप्तता पाई गई है। एसीबी ने इन तीनों सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ कोर्ट में विधिक मुकदमा चलाने के लिए संबंधित प्रशासनिक विभाग को अभियोजन स्वीकृति (Prosecution Sanction) जारी करने हेतु कड़ा पत्र लिखा है। सूत्रों के अनुसार, जैसे ही सचिवालय स्तर से इन तीनों कर्मचारियों की अभियोजन स्वीकृति एसीबी को प्राप्त होगी, इनके खिलाफ भी कोर्ट में सप्लीमेंट्री चालान पेश कर इन्हें तत्काल जेल भेजा जाएगा।

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