नई दिल्ली/जयपुर। राजस्थान की बहुचर्चित सब-इंस्पेक्टर (एसआई) भर्ती-2021 के चयनित अभ्यर्थियों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के उस फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है, जिसमें पूरी भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया गया था। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने चयनित अभ्यर्थियों द्वारा दायर स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) को खारिज करते हुए हाईकोर्ट के निर्णय को यथावत रखा है।

हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर
एसआई भर्ती-2021 के मामले में न्यायिक प्रक्रिया अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंचती दिख रही है। सबसे पहले राजस्थान हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 28 अगस्त 2025 को धांधली और अन्य अनियमितताओं के आधार पर भर्ती को रद्द करने का आदेश दिया था। इसके बाद मामला खंडपीठ (Division Bench) में गया, जहां 4 अप्रैल 2026 को खंडपीठ ने भी एकलपीठ के निर्णय को सही मानते हुए भर्ती रद्द करने के फैसले पर मुहर लगा दी थी। अभ्यर्थियों ने इसी आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन शीर्ष अदालत ने भी उनकी दलीलों को राहत के योग्य नहीं माना।
सरकार की ‘चुप्पी’ और ट्रेनी एसआई की बढ़ती बेचैनी
इस पूरे कानूनी घटनाक्रम में राज्य सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, सरकार ने अब तक सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले के खिलाफ कोई अपील दायर नहीं की है। वहीं, चयनित और वर्तमान में ट्रेनिंग ले रहे एसआई लगातार सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि वह शीर्ष अदालत में मजबूत पैरवी करे। गौरतलब है कि हाईकोर्ट की खंडपीठ में भी सरकार ने काफी देरी के बाद ‘देरी माफी’ (Condonation of Delay) के आवेदन के साथ अपील फाइल की थी।
भविष्य पर संकट: क्या अब दोबारा होगी परीक्षा?
सुप्रीम कोर्ट से एसएलपी खारिज होने के बाद अब उन अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है जिन्होंने कड़ी मेहनत से परीक्षा पास की थी। भर्ती रद्द होने का अर्थ है कि अब पूरी चयन प्रक्रिया शून्य मानी जाएगी। जानकारों का मानना है कि अब सरकार के पास दो ही रास्ते बचे हैं; या तो वह स्वयं सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका या नई अपील दायर करे, अन्यथा उसे नए सिरे से भर्ती परीक्षा आयोजित करने की तैयारी करनी होगी। पेपर लीक और धांधली के आरोपों से घिरी इस भर्ती के रद्द होने से प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।