पीएम मोदी 5 देशों के दौरे पर रवाना, यूएई और यूरोप के साथ संबंधों को मिलेगी नई धार

Madhu Manjhi

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज से पाँच देशों—यूएई, नीदरलैंड्स, स्वीडन, इटली और नॉर्वे—की अत्यंत महत्वपूर्ण यात्रा पर रवाना हो गए हैं। 20 मई तक चलने वाले इस दौरे का उद्देश्य खाड़ी देशों और यूरोप के साथ भारत के द्विपक्षीय संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाना है। रणनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह दौरा न केवल आर्थिक बल्कि सामरिक दृष्टि से भी भारत के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

पहला पड़ाव यूएई: ऊर्जा और रणनीतिक सुरक्षा पर फोकस

प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे का पहला और सबसे अहम पड़ाव संयुक्त अरब अमीरात (UAE) है। पीएम मोदी स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 11 बजे अबू धाबी पहुंचेंगे, जहां उनका भव्य स्वागत किया जाएगा। वह यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से मुलाकात करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, निवेश और रक्षा साझेदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी।

पश्चिम एशिया संकट और भारत की चिंताएं

वर्तमान में पश्चिम एशिया में जारी तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने की आशंकाओं के बीच प्रधानमंत्री का यह दौरा बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस मार्ग और खाड़ी देशों पर काफी हद तक निर्भर है।

  • एलपीजी (LPG): भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा यूएई से आयात करता है।
  • कच्चा तेल और एलएनजी: यूएई भारत का एक प्रमुख तेल और एलएनजी साझेदार है। इस यात्रा के दौरान ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए कई बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।

यूरोप के साथ नई रणनीतिक साझेदारी

यूएई के बाद प्रधानमंत्री नीदरलैंड्स, स्वीडन, इटली और नॉर्वे की यात्रा करेंगे। इन देशों के साथ भारत ग्रीन एनर्जी, तकनीकी नवाचार, जलवायु परिवर्तन और रक्षा सहयोग के क्षेत्रों में हाथ मिलाएगा। विशेष रूप से नॉर्डिक देशों (स्वीडन, नॉर्वे) के साथ तकनीक हस्तांतरण और इटली के साथ रक्षा क्षेत्र में बढ़ते सहयोग पर चर्चा केंद्रित रहेगी।

निवेश और व्यापार को मिलेगा बढ़ावा

प्रधानमंत्री का यह दौरा भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ी उम्मीदें लेकर आया है। यूएई से भारी निवेश की संभावनाओं के साथ-साथ यूरोपीय देशों के साथ ‘फ्री ट्रेड एग्रीमेंट’ (FTA) की दिशा में भी प्रगति होने के संकेत हैं। 20 मई तक चलने वाली इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का पक्ष रखेंगे और प्रवासी भारतीयों को भी संबोधित करेंगे।

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