राजस्थान के खजाने में ‘धनवर्षा’: माइंस विभाग ने तोड़े पुराने रिकॉर्ड, 21 जनवरी तक वसूले 7451 करोड़; पिछले साल से 627 करोड़ ज्यादा

जयपुर: राजस्थान सरकार के माइंस विभाग ने वित्तीय वर्ष के अंतिम चरण में राजस्व संग्रहण के मामले में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के विजन और विभागीय अधिकारियों की सक्रियता के चलते, माइंस विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष में 21 जनवरी तक 7451 करोड़ 63 लाख रुपए का रिकॉर्ड राजस्व सरकारी खजाने में जमा कराया है। यह आंकड़ा विभाग के इतिहास में इस अवधि तक का अब तक का सर्वाधिक संग्रहण है। विभाग ने पिछले वित्तीय वर्ष की इसी अवधि की तुलना में न केवल बेहतर प्रदर्शन किया है, बल्कि 9 फीसदी की शानदार विकास दर (Growth Rate) भी हासिल की है।

शनिवार को जयपुर में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में माइंस विभाग के प्रमुख सचिव टी. रविकान्त ने इन आंकड़ों को साझा करते हुए आगामी रणनीति पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि विभाग ने अवैध खनन गतिविधियों के खिलाफ जो सख्त रुख अपनाया है, उसका सीधा असर राजस्व बढ़ोतरी पर दिख रहा है। प्रमुख सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे मौजूदा आंकड़ों पर संतोष जताकर न रुकें, बल्कि वित्तीय वर्ष के शेष बचे समय में राजस्व के हर संभावित स्रोत से वसूली सुनिश्चित करें। उन्होंने अवैध खनन के मामलों में तैयार किए गए पंचनामों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए जुर्माना राशि वसूलने और आरसीसी-ईआरसीसी (RCC-ERCC) ठेकों पर रॉयल्टी वसूली की मॉनिटरिंग को और अधिक ‘चाक-चौबंद’ करने का आदेश दिया है।

विभाग के निदेशक महावीर प्रसाद मीणा ने तुलनात्मक आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष (2024-25) में 21 जनवरी तक 6824 करोड़ 54 लाख रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ था। वहीं, इस वर्ष (2025-26) इसी अवधि में यह बढ़कर 7451 करोड़ 63 लाख रुपए हो गया है, जो सीधे तौर पर 627 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी दर्शाता है। बैठक में यह भी तय किया गया कि जिन कार्यालयों में राजस्व वसूली की गति धीमी है, वहां वित्त अधिकारी और एसएमई (SME) स्तर के अधिकारी सीधे हस्तक्षेप करेंगे। साथ ही, पुरानी बकाया राशि (Old Dues) और करंट आउटस्टैंडिंग की शत-प्रतिशत वसूली के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा।

बैठक में समाप्त होने वाले रॉयल्टी ठेकों के नवीनीकरण और शेष ठेकों की तत्काल नीलामी की प्रक्रिया तेज करने पर भी जोर दिया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक में संयुक्त सचिव माइंस अरविंद सारस्वत, वित्त अधिकारी सुरेश चंद्र जैन, अतिरिक्त निदेशक मुख्यालय महेश माथुर सहित अजमेर, जयपुर, उदयपुर, भीलवाड़ा, जोधपुर और राजसमंद जोन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। विभाग का यह प्रदर्शन राज्य की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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