राजस्थान के किसानों के लिए ‘गेम चेंजर’ बने कस्टम हायरिंग सेंटर: महंगे कृषि यंत्र अब सस्ते किराए पर उपलब्ध; लागत घटी, आय बढ़ी

जयपुर: राजस्थान में खेती-किसानी का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के निर्देशों पर राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई ‘कस्टम हायरिंग सेन्टर’ (CHC) योजना प्रदेश के किसानों, विशेषकर छोटे और सीमांत काश्तकारों की आय बढ़ाने की दिशा में एक ‘मील का पत्थर’ साबित हो रही है। इस योजना के तहत अब किसानों को महंगे और आधुनिक कृषि यंत्र खरीदने की मजबूरी नहीं रही, बल्कि वे उन्हें अपनी जरूरत के अनुसार सस्ते किराए पर ले पा रहे हैं।

क्या है योजना और किसे मिल रहा लाभ?

राजस्थान कृषि तकनीक मिशन के अंतर्गत कृषि यंत्रीकरण (Farm Mechanization) को बढ़ावा देने के लिए सहकारिता विभाग के माध्यम से ग्राम सेवा सहकारी समितियों (GSSS) को कस्टम हायरिंग सेन्टर के रूप में विकसित किया गया है।

  • उद्देश्य: खेती की लागत कम करना, कम समय में अधिक काम करना और अंततः किसानों की आय में वृद्धि करना।
  • लाभार्थी: इसका सबसे ज्यादा फायदा उन लघु एवं सीमान्त कृषकों को हो रहा है, जो अपनी सीमित आय के कारण ट्रैक्टर, थ्रेशर या रोटावेटर जैसे महंगे उन्नत उपकरण खरीदने में असमर्थ थे।

एप से घर बैठे बुकिंग की सुविधा

सरकार ने इस प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और हाई-टेक बना दिया है। किसानों की सुविधा के लिए ‘राजकिसान कस्टम हायरिंग ऐप’ (RajKisan Custom Hiring App) लॉन्च किया गया है। अब किसान घर बैठे अपनी आवश्यकता और समय के अनुसार ट्रैक्टर या अन्य यंत्रों की ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं।

जरूरत के हिसाब से उपलब्ध हैं यंत्र

योजना की सतत निगरानी के लिए जिला स्तरीय मॉनिटरिंग कमेटी का गठन किया गया है। प्रत्येक CHC में स्थानीय फसल और आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। इनमें प्रमुख हैं:

  • ट्रैक्टर
  • रोटावेटर
  • कल्टीवेटर
  • सीड-कम-फर्टिलाइजर ड्रिल (बुवाई मशीन)
  • एम.बी. प्लाउ
  • थ्रेशर आदि।

जयपुर में 120 सेंटर सक्रिय, दिख रहा असर

योजना की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ‘दि जयपुर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड’ क्षेत्र के अंतर्गत वर्तमान में 120 कस्टम हायरिंग सेन्टर पूर्ण रूप से स्थापित होकर काम कर रहे हैं। ये सेंटर किसानों को नियमित रूप से सेवाएं दे रहे हैं, जिससे न केवल उनकी खेती की लागत कम हुई है, बल्कि कृषि कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता में भी उल्लेखनीय सुधार आया है।

यह योजना राज्य में आधुनिक खेती को बढ़ावा देने और किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने की दिशा में एक प्रभावी पहल सिद्ध हो रही है।

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