लंदन/नई दिल्ली। वैश्विक इस्पात उद्योग (Steel Industry) में एक युग का अंत हो गया है। दुनिया की दिग्गज स्टील कंपनी आर्सेलर मित्तल (ArcelorMittal) के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन लक्ष्मी निवास मित्तल के पिता और प्रसिद्ध उद्योगपति मोहनलाल मित्तल का गुरुवार शाम (15 जनवरी) को लंदन में निधन हो गया। वे 99 वर्ष के थे और अपने 100वें जन्मदिन से कुछ ही महीने दूर थे। उनके निधन की खबर से उद्योग जगत और उनके गृह राज्य राजस्थान में शोक की लहर दौड़ गई है।
पीएम मोदी ने बताया ‘भारतीय संस्कृति का प्रेमी’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मोहनलाल मित्तल के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर श्रद्धांजलि देते हुए लिखा कि मोहनलाल मित्तल ने न केवल उद्योग जगत में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई, बल्कि वे भारतीय संस्कृति के प्रति भी बेहद उत्साहित रहते थे। पीएम ने कहा, “समाज की प्रगति के प्रति उनके जुनून और परोपकारी कार्यों को हमेशा याद रखा जाएगा। मैं उनके साथ हुई मुलाकातों को हमेशा संजोकर रखूंगा।” केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और राजस्थान बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष सतीश पूनिया ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी है।
चूरू के राजगढ़ से लंदन तक का सफर
मोहनलाल मित्तल का जन्म 1926 में राजस्थान के चूरू जिले के राजगढ़ (सादुलपुर) कस्बे में एक साधारण परिवार में हुआ था। रेतीले धोरों से निकलकर उन्होंने अपनी मेहनत और दूरदर्शिता से एक विशाल इस्पात साम्राज्य की नींव रखी।
- शुरुआत: 1950 के दशक में उन्होंने कोलकाता से अपने व्यवसाय की शुरुआत की थी।
- वैश्विक उड़ान: बाद में वे इंडोनेशिया और फिर लंदन चले गए, जहाँ उन्होंने इस्पात व्यवसाय को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया।
- जड़ों से जुड़ाव: इतनी सफलता पाने के बाद भी वे अपनी जड़ों को कभी नहीं भूले। उन्होंने सादुलपुर और जयपुर में कौशल विकास केंद्र (Skill Development Centers) और कई सामाजिक संस्थाएं स्थापित कीं।
लक्ष्मी मित्तल बोले- ‘वे मेरे हीरो थे’
पिता के निधन पर भावुक हुए लक्ष्मी मित्तल ने कहा, “मेरे पिता एक असाधारण इंसान थे। उनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन और ईश्वर में अटूट विश्वास ही हमारी सफलता की नींव है। वे हमेशा हमें बड़ा सोचने और जोखिम लेने के लिए प्रेरित करते थे।” मोहनलाल मित्तल अपने पीछे 5 बच्चे, 11 पोते-पोतियां और 22 पड़पोते-पड़पोतियों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।
उद्योग जगत को दी नई दिशा
मोहनलाल मित्तल को इस्पात उद्योग का ‘भीष्म पितामह’ भी कहा जा सकता है। उन्होंने ही 1970 के दशक में इस्पात निर्माण में नई तकनीकों को अपनाने की शुरुआत की थी, जिसने बाद में मित्तल परिवार को ‘स्टील किंग’ का दर्जा दिलाया। उनका जाना न केवल मित्तल परिवार बल्कि पूरे भारतीय उद्योग जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
