जयपुर। राजस्थान की गुलाबी नगरी जयपुर अपनी ऐतिहासिक विरासत और बेमिसाल मेहमाननवाजी के लिए दुनिया भर में जानी जाती है। शनिवार को इसका एक और जीवंत उदाहरण देखने को मिला, जब राष्ट्रमंडल देशों (Commonwealth Nations) के 40 मुल्कों से आए 120 सदस्यीय उच्च स्तरीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविख्यात आमेर महल (Amer Fort) का भ्रमण किया। अरावली की पहाड़ियों पर स्थित इस दुर्ग की दिव्य और भव्य छटा को देखकर विदेशी मेहमान अभिभूत हो उठे।

पलक पांवड़े बिछाकर हुआ पारंपरिक स्वागत
दो दिवसीय प्रवास पर जयपुर पहुंचे इस प्रतिनिधिमंडल का जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने स्वागत किया। इसके बाद जब यह दल आमेर महल पहुंचा, तो वहां राजस्थानी लोक संस्कृति के रंग बिखर गए। पारंपरिक रीति-रिवाजों, लोक वाद्ययंत्रों की मधुर ध्वनि और आत्मीय आतिथ्य के साथ उनका भव्य स्वागत किया गया। राजस्थान की रंग-बिरंगी संस्कृति की यह जीवंत झलक देखकर विदेशी प्रतिनिधि विशेष रूप से आकर्षित हुए।
शीश महल की कारीगरी देख रह गए हैरान
पर्यटन विभाग के उच्च प्रशिक्षित गाइड्स ने प्रतिनिधिमंडल को आमेर के गौरवशाली इतिहास और राजपूतकालीन स्थापत्य कला की बारीकियों से रूबरू कराया। भ्रमण के दौरान सदस्यों ने दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास, 27 कचहरी, गणेश पोल, मुगल गार्डन और ऐतिहासिक मान सिंह महल का अवलोकन किया।
हालांकि, पूरे दौरे में जो स्थान सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र रहा, वह था ‘शीश महल’ (Mirror Palace)। कांच की अद्भुत और अद्वितीय कारीगरी को देखकर प्रतिनिधि मंत्रमुग्ध हो गए। शीश महल से नीचे नजर आने वाले मावठा सरोवर और केसर क्यारी बाग के मनोरम दृश्य ने उनकी खुशी को दोगुना कर दिया।
‘भारत की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक’
आमेर की भव्यता से प्रभावित होकर प्रतिनिधियों ने राजस्थान की समृद्ध स्थापत्य और शिल्प परंपरा की मुक्तकंठ से सराहना की। कई सदस्यों ने इसे भारत की सांस्कृतिक विरासत का एक जीवंत और अनमोल प्रतीक बताया।
उल्लेखनीय है कि इस प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रमंडल देशों की विभिन्न विधायिकाओं के अध्यक्ष, सांसद और उच्च स्तरीय संसदीय अधिकारी शामिल हैं, जो 17 और 18 जनवरी को जयपुर प्रवास पर हैं। इस दौरान वे शहर के अन्य ऐतिहासिक और प्रशासनिक महत्व के स्थलों का भी दौरा करेंगे।
