क्या किसी एक गीत में 5000 साल पुराने भारत का भूगोल, इतिहास, विज्ञान, अध्यात्म और शौर्य समा सकता है? उत्तर है- ‘हाँ’। वह गीत है- एकात्मता स्तोत्र।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की शाखाओं में प्रतिदिन सुबह गाया जाने वाला यह स्तोत्र केवल नामों की सूची नहीं है, बल्कि यह कश्मीर से कन्याकुमारी और अटक से कटक तक के भारत को जोड़ने वाला एक ‘सांस्कृतिक सूत्र’ है। यह स्तोत्र जाति, भाषा और पंथ से ऊपर उठकर ‘भारतीयता’ का बोध कराता है।
यहाँ प्रस्तुत है इस स्तोत्र के सभी 33 श्लोकों का सम्पूर्ण संस्कृत पाठ और उनका विस्तृत हिंदी भावार्थ, जो बताता है कि भारत की रगों में किन महापुरुषों और विचारों का रक्त बह रहा है।
खंड 1: मंगलाचरण और प्रकृति वंदना (राष्ट्र का आधार)
स्तोत्र की शुरुआत परमात्मा और प्रकृति को नमन करने से होती है, क्योंकि भारतीय संस्कृति में प्रकृति ही पहली माता है।
श्लोक 1:
ॐ सच्चिदानन्दरूपाय नमोऽस्तु परमात्मने।
ज्योतिर्मयस्वरूपाय विश्वमाङ्गल्यमूर्तये ॥१॥
हिंदी अर्थ: सत्, चित् और आनन्द स्वरूप वाले, ज्ञान के प्रकाश से युक्त (ज्योतिर्मय) और संपूर्ण विश्व का कल्याण करने वाले उस परमात्मा को मेरा नमस्कार है।
श्लोक 2:
प्रकृतिः पञ्चभूतानि ग्रहा लोकाः स्वरास्तथा।
दिशः कालश्च सर्वेषां सदा कुर्वन्तु मङ्गलम् ॥२॥
हिंदी अर्थ: मूल प्रकृति, पांचों महाभूत (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश), सभी ग्रह, तीनों लोक, संगीत के सातों स्वर, दसों दिशाएं और काल (समय)—ये सभी हम सबके लिए सदा मंगलकारी हों।
खंड 2: भारत माता और हमारा भूगोल
यहाँ भारत को जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि एक जीते-जागते ‘देवता’ के रूप में देखा गया है।
श्लोक 3:
रत्नाकराधौतपदां हिमालयकिरीटिनीम्।
ब्रह्मराजर्षिरत्नाढ्यां वन्दे भारतमातरम् ॥३॥
हिंदी अर्थ: रत्नाकर (हिंद महासागर) जिनके चरणों को निरंतर धोता है, हिमालय जिसका मुकुट है, और जो ब्रह्मर्षियों तथा राजर्षियों रूपी अनमोल रत्नों से समृद्ध हैं, ऐसी भारत माता की मैं वंदना करता हूँ।
श्लोक 4:
महेन्द्रो मलयः सह्यो देवतात्मा हिमालयः।
ध्येयो रैवतको विन्ध्यो गिरिश्चारावलिस्तथा ॥४॥
हिंदी अर्थ: महेंद्रगिरी (उड़ीसा), मलयगिरी (चंदन पर्वत), सह्याद्रि (पश्चिमी घाट), देवताओं की आत्मा हिमालय, रैवतक (गिरनार), विंध्याचल और अरावली पर्वत—ये सभी पर्वत हमारे रक्षक और पवित्र हैं।
श्लोक 5:
गङ्गा सरस्वती सिन्धुर्ब्रह्मपुत्रश्च गण्डकी।
कावेरी यमुना रेवा कृष्णा गोदा महानदी ॥५॥
हिंदी अर्थ: गंगा, सरस्वती, सिंधु, ब्रह्मपुत्र, गंडकी, कावेरी, यमुना, रेवा (नर्मदा), कृष्णा, गोदावरी और महानदी—इन पवित्र नदियों का जल हमारी राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है।
खंड 3: पवित्र नगर (ऐतिहासिक धरोहर)
श्लोक 6:
अयोध्या मथुरा माया काशीकाञ्ची अवन्तिका।
वैशाली द्वारिका ध्येया पुरी तक्षशिला गया ॥६॥
हिंदी अर्थ: अयोध्या, मथुरा, माया (हरिद्वार), काशी, कांचीपुरम, अवंतिका (उज्जैन), वैशाली, द्वारिका, जगन्नाथ पुरी, तक्षशिला (प्राचीन विश्वविद्यालय) और गया—ये सभी ऐतिहासिक नगर ध्यान करने योग्य हैं।
श्लोक 7:
प्रयागः पाटलीपुत्रं विजयानगरं महत्।
इन्द्रप्रस्थं सोमनाथः तथाSमृतसरः प्रियम् ॥७॥
हिंदी अर्थ: तीर्थराज प्रयाग, पाटलिपुत्र (पटना), महान विजयनगर साम्राज्य (हम्पी), इंद्रप्रस्थ (दिल्ली), सोमनाथ और प्रिय अमृतसर—ये सभी स्थान हमारे राष्ट्र की धरोहर हैं।
खंड 4: ज्ञान परंपरा (ग्रंथ और शास्त्र)
यह खंड भारत की समावेशी संस्कृति का प्रमाण है, जहाँ वेद और गुरु ग्रंथ साहिब एक समान पूज्य हैं।
श्लोक 8:
चतुर्वेदाः पुराणानि सर्वोपनिषदस्तथा।
रामायणं भारतं च गीता सद्दर्शनानि च ॥८॥
हिंदी अर्थ: चारों वेद, अठारह पुराण, सभी उपनिषद, रामायण, महाभारत, गीता और छह दर्शन शास्त्र (न्याय, सांख्य आदि)—ये हमारी ज्ञान संपदा हैं।
श्लोक 9:
जैनागमास्त्रिपिटकाः गुरुग्रन्थः सतां गिरः।
एषः ज्ञाननिधिः श्रेष्ठः श्रद्धेयो हृदि सर्वदा ॥९॥
हिंदी अर्थ: जैन आगम, बौद्ध त्रिपिटक और गुरु ग्रंथ साहिब—यह श्रेष्ठ ज्ञान का खजाना (निधि) हमारे हृदय में सदा श्रद्धा के योग्य है।
खंड 5: मातृशक्ति वंदना (नारी गौरव)
भारतीय संस्कृति में स्त्रियों के त्याग और शौर्य का वर्णन।
श्लोक 10:
अरुन्धत्यनसूया च सावित्री जानकी सती।
द्रौपदी कण्णगी गार्गी मीरा दुर्गावती तथा ॥१०॥
हिंदी अर्थ: सती अरुंधति, अनसूया, सावित्री, जानकी (सीता), सती, द्रौपदी, कण्णगी, विदुषी गार्गी, भक्त मीरा और रानी दुर्गावती।
श्लोक 11:
लक्ष्मीरहल्या चन्नम्मा रुद्रमाम्बा सुविक्रमा।
निवेदिता सारदा च प्रणम्या मातृदेवताः ॥११॥
हिंदी अर्थ: झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, अहिल्याबाई होल्कर, कित्तूर चेनम्मा, रानी रुद्रमाम्बा, भगिनी निवेदिता और माँ सारदा—इन सभी मातृशक्तियों को प्रणाम है।
खंड 6: महापुरुष और पौराणिक चरित्र
श्लोक 12:
श्रीरामो भरतः कृष्णो भीष्मो धर्मस्तथार्जुनः।
मार्कण्डेयो हरिश्चन्द्र: प्रह्लादो नारदो ध्रुवः ॥१२॥
हिंदी अर्थ: मर्यादा पुरुषोत्तम राम, भरत, श्री कृष्ण, भीष्म पितामह, धर्मराज युधिष्ठिर, अर्जुन, ऋषि मार्कंडेय, सत्यवादी हरिश्चंद्र, प्रह्लाद, नारद और ध्रुव।
श्लोक 13:
हनुमान् जनको व्यासो वसिष्ठश्च शुको बलिः।
दधीचिविश्वकर्माणौ पृथुवाल्मीकिभार्गवाः ॥१३॥
हिंदी अर्थ: हनुमान जी, राजा जनक, वेदव्यास, वसिष्ठ, शुकदेव, राजा बलि, दधीचि, विश्वकर्मा, राजा पृथु, वाल्मीकि और परशुराम।
श्लोक 14:
भगीरथश्चैकलव्यो मनुर्धन्वन्तरिस्तथा।
शिविश्च रन्तिदेवश्च पुराणोद्गीतकीर्तय: ॥१४॥
हिंदी अर्थ: भगीरथ, एकलव्य, मनु, धन्वंतरि, राजा शिवि और रंतिदेव—इनकी कीर्ति पुराणों में गाई गई है।
खंड 7: संत, समाज सुधारक और समरसता
यह खंड बताता है कि भारत में पंथ अलग हो सकते हैं, पर तत्व एक है।
श्लोक 15:
बुद्धा जिनेन्द्रा गोरक्षः पाणिनिश्च पतञ्जलिः।
शङ्करो मध्वनिंबार्कौ श्रीरामानुजवल्लभौ ॥१५॥
हिंदी अर्थ: बुद्ध, महावीर (जिनेन्द्र), गोरखनाथ, पाणिनी, पतंजलि, शंकराचार्य, मध्वाचार्य, निम्बार्काचार्य, रामानुजाचार्य और वल्लभाचार्य।
श्लोक 16:
झूलेलालोSथ चैतन्यः तिरुवल्लुवरस्तथा।
नायन्मारालवाराश्च कंबश्च बसवेश्वरः ॥१६॥
हिंदी अर्थ: झूलेलाल, चैतन्य महाप्रभु, तिरुवल्लुवर, दक्षिण के नायन्मार व आलवार संत, कंबन और बसवेश्वर।
श्लोक 17:
देवलो रविदासश्च कबीरो गुरुनानकः।
नरसिस्तुलसीदासो दशमेशो दृढव्रतः ॥१७॥
हिंदी अर्थ: महर्षि देवल, संत रविदास, कबीर, गुरु नानक देव, नरसी मेहता, तुलसीदास और गुरु गोविंद सिंह (दशमेश)।
श्लोक 18:
श्रीमत् शङ्करदेवश्च बन्धू सायणमाधवौ।
ज्ञानेश्वरस्तुकारामो रामदासः पुरन्दरः ॥१८॥
हिंदी अर्थ: असम के शंकरदेव, सायण और माधव, ज्ञानेश्वर,तुकाराम, समर्थ रामदास और पुरंदर दास।
श्लोक 19:
बिरसा सहजानन्दो रामानन्दस्तथा महान्।
वितरन्तु सदैवैते दैवीं सद्गुणसंपदम् ॥१९॥
हिंदी अर्थ: भगवान बिरसा मुंडा, स्वामी सहजानंद और स्वामी रामानंद—ये सभी महापुरुष हमें दैवीय सद्गुण प्रदान करें।
खंड 8: कला, साहित्य और शौर्य
श्लोक 20:
भरतर्षिः कालिदासः श्रीभोजो जकणस्तथा।
सूरदासस्त्यागराजो रसखानश्च सत्कविः ॥२०॥
हिंदी अर्थ: भरत मुनि, कालिदास, राजा भोज, शिल्पी जकण, सूरदास, त्यागराज और रसखान जैसे सत्कवि।
श्लोक 21:
रविवर्मा भातखण्डे भाग्यचन्द्रः स भूपतिः।
कलावंतश्च विख्याताः स्मरणीया निरन्तरम्॥२१॥
हिंदी अर्थ: राजा रवि वर्मा, पं. भातखंडे और मणिपुर के राजा भाग्यचंद्र—ये कलावंत निरंतर स्मरणीय हैं।
श्लोक 22 (वीर योद्धा):
अगस्त्यः कंबुकौण्डिन्यौ राजेन्द्रश्चोलवंशजः।
अशोकः पुश्यमित्रश्च खारवेलः सुनीतिमान् ॥२२॥
हिंदी अर्थ: अगस्त्य, कंबु, कौंडिन्य, राजेंद्र चोल, अशोक, पुष्यमित्र शुंग और राजा खारवेल।
श्लोक 23:
चाणक्यचन्द्रगुप्तौ च विक्रमः शालिवाहनः।
समुद्रगुप्तः श्रीहर्षः शैलेन्द्रो बप्परावलः ॥२३॥
हिंदी अर्थ: चाणक्य, चंद्रगुप्त, विक्रमादित्य, शालिवाहन, समुद्रगुप्त, हर्षवर्धन, शैलेन्द्र और बप्पा रावल।
श्लोक 24:
लाचिद्भास्करवर्मा च यशोधर्मा च हूणजित्।
श्रीकृष्णदेवरायश्च ललितादित्य उद्बलः ॥२४॥
हिंदी अर्थ: लचित बोरफुकन, भास्कर वर्मा, यशोधर्मा, कृष्णदेवराय और ललितादित्य।
श्लोक 25:
मुसुनूरिनायकौ तौ प्रतापः शिवभूपतिः।
रणजि सिंह इत्येते वीरा विख्यातविक्रमाः ॥२५॥
हिंदी अर्थ: मुसुनूरी नायक, महाराणा प्रताप, शिवाजी महाराज और रणजीत सिंह—ये सभी महान वीर हैं।
खंड 9: विज्ञान और नवजागरण
श्लोक 26 (वैज्ञानिक):
वैज्ञानिकाश्च कपिलः कणादः सुश्रुतस्तथा।
चरको भास्कराचार्यो वराहमिहिरः सुधीः ॥२६॥
हिंदी अर्थ: वैज्ञानिक ऋषि कपिल, कणाद, सुश्रुत, चरक, भास्कराचार्य और वराहमिहिर।
श्लोक 27:
नागार्जुनो भरद्वाजः आर्यभट्टो वसुर्बुधः।
ध्येयो वेंकटरामश्च विज्ञा रामानुजादयः ॥२७॥
हिंदी अर्थ: नागार्जुन, भरद्वाज, आर्यभट्ट, जगदीश चंद्र बसु, सी.वी. रमन और रामानुजन आदि विज्ञानी ध्येय हैं।
श्लोक 28 (आधुनिक महापुरुष):
रामकृष्णो दयानन्दो रवीन्द्रो राममोहनः।
रामतीर्थोऽरविंदश्च विवेकानन्द उद्यशाः ॥२८॥
हिंदी अर्थ: रामकृष्ण परमहंस, दयानंद सरस्वती, रवींद्रनाथ टैगोर, राजा राममोहन राय, स्वामी रामतीर्थ, अरविंद और विवेकानंद।
श्लोक 29:
दादाभाई गोपबन्धुः तिलको गान्धिरादृताः।
रमणो मालवीयश्च श्रीसुब्रह्मण्यभारती ॥२९॥
हिंदी अर्थ: दादाभाई नौरोजी, गोपबंधु दास, तिलक, महात्मा गांधी, महर्षि रमण, मालवीय जी और सुब्रह्मण्य भारती।
श्लोक 30:
सुभाषः प्रणवानन्दः क्रान्तिवीरो विनायकः।
ठक्करो भीमरावश्च फुले नारायणो गुरुः ॥३०॥
हिंदी अर्थ: सुभाष चंद्र बोस, स्वामी प्रणवानंद, विनायक सावरकर, ठक्कर बापा, डॉ. भीमराव आंबेडकर, महात्मा फुले और नारायण गुरु।
श्लोक 31:
संघशक्तिप्रणेतारौ केशवो माधवस्तथा।
स्मरणीयाः सदैवैते नवचैतन्यदायकाः ॥३१॥
हिंदी अर्थ: संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और माधव सदाशिव गोलवलकर (श्रीगुरुजी)—ये समाज में नई चेतना जगाने वाले सदैव स्मरणीय हैं।
खंड 10: निष्कर्ष (फलश्रुति)
श्लोक 32:
अनुक्ता ये भक्ताः प्रभुचरणसंसक्तहृदयाः।
अनिर्दष्टा वीराः अधिसमरमुद्ध्वस्तरिपवः।
समाजोद्धर्तारः सुहितकरविज्ञाननिपुणाः।
नमस्तेभ्यो भूयात् सकलसुजनेभ्यः प्रतिदिनम् ॥ ३२॥
हिंदी अर्थ: (अनाम वीरों को नमन) जिनका नाम नहीं लिया जा सका, ऐसे प्रभु भक्त, वे अज्ञात वीर जिन्होंने युद्ध में शत्रुओं का नाश किया, समाज सुधारक और जनकल्याणकारी वैज्ञानिकों को हमारा प्रतिदिन नमस्कार हो।
श्लोक 33:
इदमेकात्मतास्तोत्रं श्रद्धया यः सदा पठेत्।
स राष्ट्रधर्मनिष्ठावान् अखण्डं भारतं स्मरेत् ॥३३॥
हिंदी अर्थ: जो व्यक्ति श्रद्धापूर्वक इस एकात्मता स्तोत्र का नित्य पाठ करता है, वह राष्ट्रधर्म के प्रति निष्ठावान होकर ‘अखंड भारत’ का स्मरण करता है।
।। भारत माता की जय ।।
