प्रेरक प्रसंग: अनोखा स्वयंवर | Prerak Prasang Hindi

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यह एक ऐसी कहानी है जो सिखाती है कि किताबी ज्ञान से ज़्यादा, जीवन की समझ और व्यावहारिक बुद्धिमत्ता मायने रखती है। एक छोटे से प्रश्न ने बड़े-बड़े राजाओं को संकट में डाल दिया, लेकिन एक साधारण व्यक्ति ने अपनी हाजिरजवाबी से सब कुछ जीत लिया।


अनोखे स्वयंवर की शर्त

एक राजा ने अपनी बेटी के स्वयंवर के लिए एक अनोखी और कठिन शर्त रखी। शर्त यह थी कि जो भी 20 तक की गिनती ऐसी सुनाएगा जिसमें सारा संसार समा जाए, वही राजकुमारी का पति बनेगा। यदि कोई भी राजा यह गिनती नहीं सुना सका, तो उसे 20 कोड़े खाने पड़ेंगे।

एक-एक कर कई शूरवीर और ज्ञानी राजा आए। उन्होंने अपनी पढ़ी हुई गिनती सुनाई, लेकिन कोई भी गिनती राजकुमारी की शर्त को पूरा नहीं कर पाई। जो भी आता, दंड के रूप में कोड़े खाकर वापस चला जाता। कई राजा तो इस अपमान के डर से आगे ही नहीं आए, यह कहते हुए कि गिनती तो गिनती होती है—राजकुमारी केवल उन्हें पिटवाकर मज़े ले रही है।

हलवाई की बुद्धिमत्ता

यह सब देखकर दरबार में मौजूद एक हलवाई हँसने लगा। उसने राजाओं को ललकारते हुए कहा, “डूब मरो राजाओं, आप सबको 20 तक की गिनती नहीं आती!”

क्रोधित राजाओं ने उसे दंड देने की माँग की। राजा ने हलवाई से पूछा, “यदि तुम गिनती जानते हो तो सुनाओगे?”

हलवाई ने विनम्रता से अपनी बात रखी कि यह स्वयंवर केवल राजाओं के लिए है और उसे गिनती सुनाने का कोई लाभ नहीं होगा। उसकी बात सुनकर, पास खड़ी राजकुमारी ने घोषणा कर दी, “ठीक है, यदि तुम गिनती सुना सको तो मैं तुमसे शादी करूँगी, और यदि नहीं सुना सके तो तुम्हें मृत्युदंड दिया जाएगा।”

वह चमत्कारी गिनती

सबकी आँखें हलवाई पर टिकी थीं। मृत्यु का भय सामने था, पर हलवाई ने साहस से राजा की आज्ञा ली और अपनी अनोखी गिनती शुरू की:

एक भगवान (ईश्वर, जो सम्पूर्ण ब्रह्मांड में व्याप्त है), दो पक्ष (शुक्ल और कृष्ण), तीन लोक (स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल), चार युग (सतयुग, त्रेता, द्वापर, कलियुग), पाँच पांडव, छह शास्त्र, सात वार (सप्ताह के सात दिन), आठ खंड (पृथ्वी के आठ खंड), नौ ग्रह, दस दिशा, ग्यारह रुद्र, बारह महीने, तेरह रत्न (चौदह विद्या के साथ), चौदह विद्या, पन्द्रह तिथि, सोलह श्राद्ध, सत्रह वनस्पति, अठारह पुराण, उन्नीसवीं तुम (राजकुमारी) और बीसवां मैं…

हलवाई की असाधारण बुद्धिमत्ता (extraordinary wisdom) और हाजिरजवाबी से गिनती पूरी हुई, जिसमें संसार की सभी महत्वपूर्ण वस्तुएं समाहित थीं। शर्त पूरी होने पर राजकुमारी ने खुशी-खुशी हलवाई से विवाह किया।


प्रेरक शिक्षा और निष्कर्ष

यह प्रेरक प्रसंग हमें सिखाता है कि किताबी ज्ञान से बड़ा अनुभव और जीवन की समझ होती है।

  • सदैव प्रसन्न रहिये – जो प्राप्त है, पर्याप्त है।
  • जिसका मन मस्त है – उसके पास समस्त है।
  • सच्ची बुद्धिमत्ता आपके पद या धन की मोहताज नहीं होती। जीवन में मिली हर चुनौती का समाधान अक्सर सरल, किंतु गहन समझ में छिपा होता है।

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