RSS के राजस्थान क्षेत्रीय कार्यालय में साकार हुआ ‘पंच-परिवर्तन’ का संकल्प, छत पर बनाया ऑर्गेनिक किचन गार्डन

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भारती भवन की छत पर बनाया गया किचन गार्डन

जयपुर: शहरीकरण की अंधी दौड़ में कंक्रीट के जंगलों में तब्दील होते शहरों और रसायनों से विषाक्त होते अन्न-सब्जियों के बीच, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के क्षेत्रीय कार्यालय ‘भारती भवन’ ने प्रकृति और पर्यावरण के अनुकूल एक अनुकरणीय पहल की है। समाज के समक्ष आचरण से उदाहरण प्रस्तुत करने की संघ की परंपरा का निर्वहन करते हुए, भारती भवन की छत (Rooftop) पर एक विस्तृत और पूर्णतः ऑर्गेनिक किचन गार्डन स्थापित किया गया है।

इस बगिया की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें किसी भी प्रकार के रासायनिक खाद (यूरिया/डीएपी) या कीटनाशकों का लेशमात्र भी उपयोग नहीं किया गया है। इसका उद्देश्य स्वयंसेवकों को पूर्ण रूप से सात्विक, शुद्ध और रसायन-मुक्त आहार उपलब्ध कराना है।

नींबू से लेकर पालक-टमाटर तक, छत पर उगाई गईं तमाम सब्जियां

इस महत्वाकांक्षी ‘रूफटॉप फार्मिंग’ के अंतर्गत छत पर विशेष रूप से क्यारियां, ग्रो बैग्स और ड्रम तैयार किए गए हैं, जिनमें उपजाऊ मिट्टी और गोमय आधारित जैविक खाद का मिश्रण भरा गया है। इस गार्डन में रसोई के रोजमर्रा के उपयोग में आने वाली लगभग सभी प्रमुख सब्जियां लगाई गई हैं। यहां नींबू के पौधों के साथ-साथ धनिया, मेथी, टमाटर, बैंगन, हरी मिर्च, गोभी और पालक लहलहा रहे हैं। योजना यह है कि कार्यालय की भोजनालय व्यवस्था में बाहर से आने वाली सब्जियों पर निर्भरता कम हो और पूर्णतः पौष्टिक आहार प्राप्त हो सके।

शहरी जीवन में रूफटॉप फार्मिंग की प्रासंगिकता

आज के दौर में जहां महानगरों में जगह की कमी और प्रदूषण विकराल रूप ले रहे हैं, वहां ‘रूफटॉप फार्मिंग’ शहरी जीवन के लिए एक वरदान है। छतों पर बागवानी करने से न केवल भवन का तापमान संतुलित रहता है, बल्कि यह ‘अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट’ (Urban Heat Island Effect) को कम करने में भी कारगर है। इसके अतिरिक्त, भोजनालय से निकलने वाले गीले कचरे का उपयोग जैविक खाद (कम्पोस्ट) बनाने में किया जा सकता है, जो ‘शून्य अपशिष्ट’ (Zero Waste) की अवधारणा को पुष्ट करता है। यह शहरी निवासियों को शुद्ध और ताजी सब्जियां उगाने का सबसे टिकाऊ विकल्प प्रदान करता है।

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RSS के ‘पंच-परिवर्तन’ का जीवंत और व्यावहारिक मॉडल

आरएसएस अपने शताब्दी वर्ष (2025) की ओर अग्रसर है। इस अवसर पर संघ ने समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए ‘पंच-परिवर्तन’ (सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन, स्वदेशी आचरण और नागरिक कर्तव्य) का जो संकल्प लिया है, भारती भवन का यह ऑर्गेनिक गार्डन उसी विजन का एक उत्कृष्ट व्यावहारिक उदाहरण है:

  • पर्यावरण संरक्षण: प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाते हुए, बिना किसी रसायन के खेती करना, धरती माता (मिट्टी) और पर्यावरण के संरक्षण के प्रति हमारे दायित्व को दर्शाता है।
  • स्वदेशी आचरण: अपनी पारंपरिक कृषि पद्धतियों और जैविक खाद से जुड़ते हुए घर पर ही स्वावलंबी (आत्मनिर्भर) बनने की दिशा में यह एक सार्थक कदम है।
  • कुटुंब प्रबोधन और स्वास्थ्य: ‘कार्यालय परिवार’ के सभी सदस्यों को पूर्णतः सात्विक, स्वच्छ और निरापद आहार उपलब्ध कराना इस पहल का मुख्य उद्देश्य है, जिससे स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन का निर्माण हो सके।

वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन से साकार हुई योजना

इस अनूठे ऑर्गेनिक गार्डन का प्रकल्प क्षेत्रीय प्रचारक माननीय निम्बाराम जी, शंकर जी और कैलाश जी सहित केंद्र के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन और विशेष प्रयासों से साकार हुआ है।

अधिकारियों को विश्वास है कि यह सात्विक बगिया जल्द ही फलेगी-फूलेगी और इसका उपयोग भारती भवन के दैनिक भोजन में किया जाएगा। यह पहल न केवल स्वास्थ्य संवर्धन के लिए है, बल्कि यह महानगरीय समाज के समक्ष ‘स्वावलंबन और प्रकृति वंदन’ का एक ऐसा मॉडल प्रस्तुत करती है, जिससे प्रेरणा लेकर आम नागरिक भी अपने घरों की छतों को हरी-भरी बगिया में बदल सकते हैं।

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