जयपुर। पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती के उपलक्ष्य में रविवार को जयपुर के कांस्टीट्यूशनल क्लब में “एकात्म मानवदर्शन एवं स्त्री विमर्श” विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति समारोह समिति के महिला प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की, जबकि भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी मुख्य वक्ता के तौर पर ऑनलाइन माध्यम से जुड़ीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता नीता बूथरा ने की और विशिष्ट अतिथि के रूप में संगीता जांगिड़ उपस्थित रहीं।

निर्णय लेने में सक्षम हों महिलाएं: स्मृति ईरानी
मुख्य वक्ता स्मृति ईरानी ने ऑनलाइन जुड़कर स्त्री विमर्श के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तीकरण का अर्थ केवल महिलाओं को सुविधाएं देना नहीं है, बल्कि उन्हें शिक्षा, कौशल, रोजगार और निर्णय लेने की प्रक्रिया में प्रभावी भूमिका देना है। जब कोई महिला स्वयं अपने निर्णय लेने में सक्षम होती है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव उसके परिवार, समाज और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचता है। ईरानी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के ‘एकात्म मानवदर्शन’ का जिक्र करते हुए कहा कि व्यक्ति के विकास को राष्ट्र के विकास से अलग नहीं देखा जा सकता। भारतीय परंपरा में नारी को हमेशा शक्ति, सृजन और नेतृत्व के रूप में सम्मान दिया गया है। उन्होंने महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता और उनके सामने मौजूद समकालीन चुनौतियों से निपटने के लिए सामाजिक जागरूकता पर विशेष बल दिया।
महिलाओं की जिम्मेदारी दोहरी और महत्वपूर्ण: दीया कुमारी

उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय समाज के विकास में महिलाओं की भूमिका सदैव अग्रणी रही है। उन्होंने महिलाओं की शिक्षा, सुरक्षा, स्वावलंबन और निर्णय प्रक्रिया में समान सहभागिता को समाज की प्रगति का मूल आधार बताया। दीया कुमारी ने स्पष्ट किया कि महिलाओं को आगे बढ़ने के समान अवसर मिलने चाहिए और उनके नेतृत्व को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज महिला घर-परिवार के साथ-साथ सामाजिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी बखूबी निभा रही है।
एकात्म मानवदर्शन में है व्यक्ति से राष्ट्र तक के विकास का सूत्र
समिति के अध्यक्ष प्रो. मोहन लाल छीपा ने कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए कहा कि पंडित दीनदयाल का एकात्म मानवदर्शन व्यक्ति, परिवार, समाज और राष्ट्र के समग्र विकास की अवधारणा प्रस्तुत करता है। भारतीय चिंतन परंपरा में नारी हमेशा समाज की सक्रिय और सम्मानित शक्ति रही है।
विशिष्ट अतिथि संगीता जांगिड़ ने महिलाओं की सामाजिक व आर्थिक भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। वहीं, कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही नीता बूथरा ने कहा कि स्त्री विमर्श को भारतीय सांस्कृतिक संदर्भों में समझने की आवश्यकता है, जिससे महिलाओं की गरिमा को केंद्र में रखकर एक समावेशी समाज का निर्माण किया जा सके।
इनकी रही प्रमुख उपस्थिति
मंच संचालन सुश्री नर्बदा इन्दौरिया ने किया। इस विशेष व्याख्यान में समिति के उपाध्यक्ष नीरज कुमावत, गजेंद्र ज्ञानपुरिया, सचिव प्रतापभानू सिंह शेखावत, राजेश रावत, डॉ. जय सिंह राठौड़, अम्बरीष प्रजापति सहित महिला प्रकोष्ठ की पदाधिकारी, शिक्षाविद् और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी बड़ी संख्या में महिलाएं व गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
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