जयपुर के पाथेय भवन में ‘हम भारत के लोग’ पुस्तक के भव्य विमोचन समारोह के दौरान वैचारिक विमर्श के कई अहम पहलू सामने आए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए धर्म जागरण समन्वय के अखिल भारतीय विधि प्रमुख राम प्रसाद ने धर्मांतरण और भारतीय मुसलमानों की जड़ों को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने मंच से स्पष्ट रूप से कहा कि पूरे भारत में रहने वाले मुसलमानों के पूर्वज मूल रूप से हिंदू ही हैं। अपनी बात को प्रामाणिक बनाने के लिए उन्होंने राजस्थान और हरियाणा से लगे मेवात क्षेत्र में मुसलमानों की स्थिति पर किए गए एक विशेष शोध (रिसर्च) का विस्तृत हवाला दिया और कई ऐतिहासिक तथ्य श्रोताओं के सामने रखे।
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राम प्रसाद ने बताया कि मेवात क्षेत्र में किए गए इस गहन अध्ययन से यह बात प्रमुखता से सामने आई है कि इस इलाके में सबसे ज्यादा धर्म परिवर्तन मीणा समाज के लोगों का किया गया था। यह तथ्य इस बात की पुष्टि करता है कि वर्तमान में वहां रह रहे मुस्लिम समाज की जड़ें सीधे तौर पर सनातनी परंपराओं और मीणा समुदाय से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने बताया कि भले ही कालांतर में किन्हीं कारणों या दबावों के चलते इन लोगों का धर्मांतरण हो गया हो, लेकिन उनकी जीवनशैली, संस्कृति और सामाजिक ताने-बाने में आज भी उनके पूर्वजों की स्पष्ट झलक देखने को मिलती है।
अपने संबोधन को आगे बढ़ाते हुए राम प्रसाद ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि मेवात के ये मुसलमान आज भी अपने हिंदू पूर्वजों को पूरी तरह से स्वीकार करते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, वे अपने पारंपरिक रीति-रिवाजों, पुरानी परंपराओं और सामाजिक मान्यताओं का आज भी उसी तरह से पालन कर रहे हैं, जैसा उनके पूर्वज सदियों पहले किया करते थे। उनका यह वक्तव्य कार्यक्रम के मुख्य विषय और पुस्तक के मूल संदेश को और अधिक मजबूती प्रदान करता नजर आया, जिसने सभागार में मौजूद सभी लोगों को भारतीय समाज की इस अटूट सांस्कृतिक एकता और वंशावली के महत्व पर गहराई से विचार करने के लिए प्रेरित किया।
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