जयपुर। राजधानी जयपुर के पाथेय भवन स्थित देवर्षि नारद सभागार में ‘हम भारत के लोग’ पुस्तक का भव्य विमोचन समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे।

मंच पर अखिल भारतीय विधि प्रमुख और धर्म जागरण समन्वयक राम प्रसाद, राजस्थान साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष डॉ. इन्दुशेखर तत्पुरुष, राजस्थान राज्य अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष सरदार जसबीर सिंह, ‘आओ अपनी जड़ों से जुड़ें’ अभियान के राष्ट्रीय संयोजक प्रोफेसर डॉ. ताहिर हुसैन और पुस्तक के लेखक याजवेंद्र यादव मौजूद रहे। कार्यक्रम में वक्ताओं ने अखंड भारत, भारतीय मुसलमानों की जड़ों और राष्ट्रवाद पर खुलकर अपने विचार रखे।
संविधान के प्रथम चार शब्दों पर आधारित है पुस्तक
कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ. इन्दुशेखर तत्पुरुष ने पुस्तक की प्रस्तावना रखी। उन्होंने बताया कि यह पुस्तक भारतीय संविधान की प्रस्तावना के प्रथम चार शब्दों (हम भारत के लोग) पर केंद्रित है।
- उन्होंने पुस्तक के विषयों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसमें हमारा डीएनए, भारत के राष्ट्रवादी मुसलमान, इस्लामिक कन्वर्जन, शुद्धीकरण और घर वापसी जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है।
- उन्होंने इस पुस्तक के सार को तीन शब्दों ‘सत्यम, शिवम, सुंदरम’ में पिरोते हुए कहा कि यह केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व के कल्याण के लिए है।
विश्व के 4 प्रमुख धर्मों का उद्गम भारत से हुआ: सरदार जसबीर सिंह
राजस्थान राज्य अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष सरदार जसबीर सिंह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारत की समृद्ध विरासत पर गर्व व्यक्त किया। भारतीय ज्ञान परंपरा का विशेष रूप से जिक्र करते हुए तक्षशिला, नालंदा और विक्रमशिला जैसे प्राचीन शिक्षा केंद्रों का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत सदियों से विश्व का ‘विश्वगुरु’ रहा है। सरदार जसबीर सिंह ने पूरी दुनिया की धार्मिक परंपराओं का उल्लेख करते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण तथ्य साझा किया कि विश्व में मौजूद 8 प्रमुख धार्मिक परंपराओं में से 4 का उद्गम केवल भारत से ही हुआ है, जो हमारी भूमि की वैचारिक और आध्यात्मिक महानता को दर्शाता है।
‘देश के 99 प्रतिशत मुस्लिम सनातनी हैं’: डॉ. ताहिर हुसैन
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रोफेसर डॉ. ताहिर हुसैन ने बेबाक राय रखी। उन्होंने कहा कि भारत के विभाजन के लिए केवल मुस्लिम या ईसाई नहीं, बल्कि सभी सनातनी (हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई) समान रूप से जिम्मेदार हैं। डॉ. हुसैन ने जोर देकर कहा कि भारत में रहने वाले 99 प्रतिशत मुसलमान सनातनी हैं और हमारा देश उग्रवादियों का नहीं, बल्कि उदारवादियों का देश है। मुस्लिम समाज को संदेश देते हुए उन्होंने कहा, “आप मुस्लिम रहें, इसमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन यह कभी न भूलें कि हमारे पूर्वज हिंदू थे।” उन्होंने मक्का (हज) यात्रा का उदाहरण देते हुए कहा कि जब कोई भारतीय वहां जाता है, तो उससे उसका धर्म नहीं पूछा जाता, बल्कि उसे ‘भारतीय’ ही कहा जाता है। इसलिए, धर्म से पहले हमें हमेशा एक ‘भारतीय’ बने रहना चाहिए।
वंशावली से मिलते हैं पूर्वजों के हिंदू होने के प्रामाणिक साक्ष्य: राम प्रसाद
अखिल भारतीय विधि प्रमुख राम प्रसाद ने अखंड भारत का जिक्र करते हुए अफगानिस्तान के कृषि मंत्री के उस बयान की याद दिलाई, जिसमें उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि ‘हमारा डीएनए भारत का है और हम अखंड भारत का हिस्सा हैं।’
उन्होंने इंडोनेशिया का उदाहरण दिया, जो एक बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश होने के बावजूद आज भी सनातनी परंपराओं का पालन करता है। भारत में मुस्लिम आक्रांताओं, विशेषकर औरंगजेब का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जो शासक सत्ता के लिए अपने पिता और भाई का सगा नहीं हुआ, वह अपने धर्म का क्या सगा होता! उन्होंने कहा कि यदि भारत में इस्लाम आक्रांताओं की तलवार के बजाय किसी फकीर या मौलवी के जरिए सद्भाव से आता, तो आज जैसी नफरत की स्थिति कभी पैदा नहीं होती।
राम प्रसाद ने राजस्थान के ब्यावर में मुस्लिम समाज द्वारा बनाए गए आशापुरा माता मंदिर, महान कृष्ण भक्त कवि रसखान और औरंगजेब की बहन ताज बीबी के उदाहरण दिए। उन्होंने कहा कि भारत में वंशावली की एक पुरानी और प्रामाणिक परंपरा है, और जब भी भारतीय मुस्लिमों के पूर्वजों की बात आती है, तो वंशावली से उनके हिंदू होने के प्रमाण स्पष्ट मिल जाते हैं, जिसे झुठलाया नहीं जा सकता।
कसाब चाहिए या कलाम, यह हर भारतीय जानता है: इंद्रेश कुमार

मुख्य अतिथि इंद्रेश कुमार ने अपने ओजस्वी संबोधन में कहा कि दुनिया की आधी समस्याओं का हल केवल ‘भाई-बहन’ के पवित्र रिश्ते की भावना से ही खत्म हो सकता है, जो केवल भारत की संस्कृति से संभव है।
- अखंड भारत का प्रण: उन्होंने सभागार में उपस्थित लोगों से एक भावुक अपील की कि वे स्वयं से एक प्रण लें और ईश्वर से प्रार्थना करें- “हे प्रभु! मेरा जन्म भले ही खंडित भारत में हुआ हो, लेकिन मेरी मृत्यु अखंड भारत में होनी चाहिए।”
- शिक्षा और संस्कार: उन्होंने धर्म और जाति से ऊपर उठकर अच्छे-बुरे का भाव समझाते हुए कहा कि नैतिकता ही तय करती है कि श्रेष्ठ कौन है। संस्कार विहीन शिक्षा कभी इंसान नहीं बना सकती; शिक्षा चाहे किसी भी धर्म या समाज की हो, वह संस्कारवान होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हर भारतीय यह भलीभांति जानता है कि देश को ‘कसाब’ चाहिए या ‘अब्दुल कलाम’।
- वैश्विक मंच पर भारत का दबदबा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 38 देशों (जिनमें हर धर्म के देश शामिल हैं) से मिले सर्वोच्च सम्मानों का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे भारत की श्रेष्ठता बताया। उन्होंने 30 देशों के साथ भारतीय करेंसी (रुपये) में हो रहे व्यापार की भी सराहना की।
- व्यापार बनाम हथियार: इतिहास का उदाहरण देते हुए उन्होंने दुनिया और भारतीयता में फर्क समझाया। उन्होंने कहा कि पिछले दो-तीन हजार वर्षों में जब दुनिया के अन्य राजाओं या देशों ने अपना विस्तार किया, तो वे एक हाथ में धर्म और दूसरे में हथियार लेकर गए। इसके विपरीत, आज भारत जब दुनिया तक पहुंच रहा है, तो वह व्यापार, समृद्धि और अपने संस्कारों के साथ जा रहा है, जिससे किसी भी देश को कोई खतरा नहीं है।
- तुष्टिकरण पर प्रहार: विविधता और सर्वस्वीकार्यता को समझाते हुए उन्होंने दलाई लामा को दी गई शरण का उदाहरण दिया। इंडोनेशिया का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां के लोग आज भी अपनी गरुड़ एयरवेज और करेंसी पर हिंदू देवी-देवताओं के चित्र रखते हैं और अपने पूर्वजों को आदर देते हैं। आक्रांताओं पर तीखा सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग तुष्टिकरण करते हैं या देश तोड़ने की बात करते हैं, वे यह बताएं कि “क्या मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने से जन्नत मिलेगी या जहन्नुम?”
अंत में इंद्रेश कुमार ने कहा कि जो सत्य है उसे स्वीकार करना चाहिए। हमें ‘भारत, भारतीय और भारतीयता’ के भाव को लेकर आगे बढ़कर काम करना होगा। जब हम सभी अपने पूर्वजों को मानकर एकजुट होकर चलेंगे, तभी भारत को पुनः परम वैभव के शिखर तक पहुँचाना संभव हो सकेगा।
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