राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने ब्रिटेन के लंदन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान संगठन की कार्यप्रणाली और वैचारिक आधार को लेकर अहम बयान दिया है। अक्सर संघ पर लगने वाले ‘नफरत फैलाने’ के राजनीतिक आरोपों का सीधा जवाब देते हुए उन्होंने संगठन के मूल दर्शन को पूरी तरह से ‘शुद्ध सात्विक प्रेम’ पर आधारित बताया।
लंदन में प्रवासी भारतीयों और स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए डॉ. भागवत ने विरोधियों के दावों को खारिज किया। उन्होंने अपने संबोधन में स्पष्ट रूप से कहा, “मैंने कुछ लोगों को यह कहते सुना है कि हमारे काम का आधार गहरी नफ़रत है। असल में यह बिल्कुल उल्टा है। ‘शुद्ध सात्विक प्रेम’ ही हमारे काम का आधार है।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समाज को जोड़ने, आपसी भेदभाव मिटाने और राष्ट्र को उसके परम वैभव तक ले जाने का महान कार्य कभी भी नकारात्मकता, क्रोध या वैमनस्य के सहारे नहीं किया जा सकता।
संघ प्रमुख का यह बयान उन भ्रांतियों को दूर करने का एक मजबूत प्रयास है, जिनमें आरएसएस को उग्र विचारधारा या समाज बांटने वाले संगठन के रूप में पेश किया जाता है। उन्होंने यह संदेश दिया कि दुनिया भर में फैले स्वयंसेवकों का अनुशासन, उनका समर्पण और समाज के हर वर्ग के प्रति उनका सेवा भाव इसी सात्विक प्रेम, बंधुत्व और आत्मीयता का ही वास्तविक परिणाम है।
