राजस्थान के श्रीगंगानगर में कथित फर्जी डिग्री मामले में भाजपा विधायक जयदीप बिहाणी और अन्य आरोपियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) संख्या-2, श्रीगंगानगर ने आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने एक वर्ष से अधिक समय तक समन और जमानती वारंट की प्रभावी तामील नहीं होने पर पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए पुलिस अधीक्षक (SP) और बीकानेर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) को भी सख्त निर्देश जारी किए हैं।
अदालत ने जताई नाराजगी
अदालत में राज्य बनाम जयदीप बिहाणी एवं अन्य मामले की सुनवाई के दौरान परिवादी पक्ष ने दलील दी कि आरोपियों को समन और जमानती वारंट की जानकारी होने के बावजूद वे जानबूझकर अदालत में उपस्थित नहीं हो रहे हैं। अदालत ने इसे न्यायालय के आदेशों की अवहेलना मानते हुए सभी आरोपियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी करने के आदेश दिए। अगली सुनवाई 5 अगस्त को निर्धारित की गई है।
किन धाराओं में लिया गया था संज्ञान
अदालत ने बताया कि 19 मई 2025 को परिवाद में भारतीय दंड संहिता की धाराओं 417, 418, 420, 467, 468, 471 और 120-बी के तहत संज्ञान लिया गया था। इसके बाद आरोपियों को कई बार समन, जमानती वारंट और पुलिस अधीक्षक के माध्यम से अर्द्धशासकीय पत्र भेजे गए, लेकिन उनकी उपस्थिति सुनिश्चित नहीं हो सकी।
SP और IG को दिए विशेष निर्देश
अदालत ने पुलिस अधीक्षक श्रीगंगानगर को निर्देश दिए हैं कि तामीलकर्ता प्रतिदिन आरोपियों की तामील के प्रयास करे और उसकी दैनिक रिपोर्ट रोजनामचा में दर्ज की जाए। अगली सुनवाई पर यह रिकॉर्ड न्यायालय में प्रस्तुत करना होगा। यदि वारंट की तामील नहीं होती है तो संबंधित अधिकारी को स्वयं अदालत में उपस्थित होकर लिखित स्पष्टीकरण देना होगा।
इसके साथ ही बीकानेर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) को भी पत्र भेजकर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई पर विचार करने के निर्देश दिए गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला बिहाणी इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (BIFT) से कथित रूप से फर्जी डिग्री और अंकतालिकाएं जारी करने से जुड़ा है। वर्ष 2015 में न्यायालय के आदेश पर जवाहर नगर थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी।
परिवाद के अनुसार शिकायतकर्ता रविंद्र कौर ने वर्ष 2009 में संस्थान में फैशन डिजाइनिंग डिप्लोमा और बाद में बीबीए पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया था। संस्थान की ओर से यूजीसी, एआईसीटीई और विभिन्न विश्वविद्यालयों से मान्यता प्राप्त होने का दावा करते हुए करीब 1.80 लाख रुपये फीस ली गई।
बाद में शिकायतकर्ता को पता चला कि जिस विश्वविद्यालय के नाम पर डिग्री और अंकतालिकाएं जारी की गई थीं, वह संबंधित पाठ्यक्रम संचालित ही नहीं करता था और संस्थान उसका अधिकृत अध्ययन केंद्र भी नहीं था। इसके बाद मामला दर्ज कराया गया।
कई लोग हैं आरोपी
एफआईआर में तत्कालीन संस्थान अध्यक्ष जयदीप बिहाणी, प्रबंधक गोविंद सक्सेना, समन्वयक कविता चौधरी, कोषाध्यक्ष श्याम कोठारी, आईआईएफटी के सीईओ रतनादीप लाल सहित संस्थान की प्रबंध समिति और अन्य संबंधित कर्मचारियों को आरोपी बनाया गया है।
हाईकोर्ट के निर्देशों का भी उल्लेख
अपने आदेश में अदालत ने राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ के उस निर्देश का भी उल्लेख किया, जिसमें सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों में समन और वारंट की त्वरित तामील सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संबंधित पुलिस अधीक्षक पर तय की गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में केवल औपचारिक रिपोर्ट पर्याप्त नहीं है, बल्कि आरोपियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कार्रवाई आवश्यक है।