राजस्थान में निवेश को धरातल पर उतारने की दिशा में राज्य सरकार ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट के तहत हस्ताक्षरित निवेश समझौतों (एमओयू) की प्रगति की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने अधिकारियों को नवंबर 2026 तक निर्धारित ग्राउंडिंग लक्ष्य हर हाल में पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता अब केवल निवेश समझौतों पर हस्ताक्षर करने तक सीमित नहीं है। एमओयू के माध्यम से प्रस्तावित निवेश परियोजनाओं को वास्तविक रूप से जमीन पर उतारना और उनकी प्रभावी क्रियान्विति सुनिश्चित करना सरकार का मुख्य लक्ष्य है।
11 हजार से अधिक सक्रिय एमओयू
शासन सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव उद्योग शिखर अग्रवाल ने राइजिंग राजस्थान के तहत निवेश प्रस्तावों की विभागवार प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 11 हजार से अधिक सक्रिय एमओयू के माध्यम से 35 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव विभिन्न चरणों में हैं।
इनमें से 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों की ग्राउंडिंग हो चुकी है। सरकार अब शेष निवेश प्रस्तावों को भी निर्धारित समय सीमा में धरातल पर उतारने की दिशा में काम कर रही है।
नवंबर 2026 तक लक्ष्य पूरा करने पर जोर
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने सभी विभागों को नियमित रूप से समीक्षा बैठकें आयोजित करने और लंबित मामलों का समयबद्ध तरीके से निस्तारण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निवेश परियोजनाओं से संबंधित आवश्यक प्रस्ताव और फाइलें जल्द प्रस्तुत की जाएं, ताकि परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में अनावश्यक देरी न हो।
उन्होंने जिला कलेक्टरों के साथ लगातार समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया। निवेश परियोजनाओं के क्रियान्वयन में स्थानीय स्तर पर आने वाली बाधाओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर करने के निर्देश दिए गए हैं।
ऊर्जा विभाग की अहम भूमिका
मुख्य सचिव ने कहा कि निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने में ऊर्जा विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है। बड़ी संख्या में निवेश परियोजनाओं के लिए बिजली और ऊर्जा से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरा करना जरूरी है। ऐसे में ऊर्जा विभाग सहित सभी संबंधित विभागों को निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए तेजी से काम करने को कहा गया है।
भूमि आवंटन और मंजूरियों पर फोकस
निवेश परियोजनाओं की ग्राउंडिंग में भूमि आवंटन, विभिन्न अनुमतियां, एनओसी, एलओआई और एलओपी जैसे मामलों का समय पर निस्तारण महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समीक्षा बैठक में इन लंबित मामलों को तेजी से निपटाने के लिए संबंधित विभागों के बीच लगातार समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया गया।
सरकार का लक्ष्य है कि निवेशकों को परियोजनाएं शुरू करने के लिए आवश्यक स्वीकृतियां और सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं, जिससे एमओयू और वास्तविक निवेश के बीच की प्रक्रिया को तेज किया जा सके।
कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी बैठक में शामिल
समीक्षा बैठक में खान एवं पेट्रोलियम, उद्योग, कौशल एवं उद्यमिता, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, चिकित्सा, राजस्व और परिवहन समेत कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। नगरीय विकास एवं आवासन, स्कूल शिक्षा, आयुष, पशुपालन, मत्स्य एवं गौ-पालन, कृषि, नागरिक उड्डयन, स्वायत्त शासन, सूचना प्रौद्योगिकी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, पर्यटन, रीको, उद्योग एवं वाणिज्य सहित अन्य विभागों के अधिकारियों ने भी बैठक में भाग लिया।
राजस्थान के सभी जिला कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक से जुड़े। बैठक का उद्देश्य निवेश प्रस्तावों की विभागवार प्रगति की समीक्षा करने के साथ नवंबर 2026 तक निर्धारित ग्राउंडिंग लक्ष्यों को पूरा करने के लिए आवश्यक कार्रवाई को गति देना रहा।
सरकार की ओर से अब निवेश प्रस्तावों की नियमित मॉनिटरिंग और विभागीय स्तर पर समन्वय के जरिए यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है कि राइजिंग राजस्थान के तहत हुए निवेश समझौते वास्तविक परियोजनाओं में बदलें और प्रदेश में निवेश, रोजगार तथा औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिले।