हर घर शुद्ध पानी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता: राजस्थान में हर माह होगा पेयजल संवाद, 13,850 गांवों को मिला मिशन का लाभ

Vidushi Singh

जल जीवन मिशन 2.0 के प्रभावी क्रियान्वयन और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल योजनाओं की वास्तविक स्थिति जानने के लिए जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने शुक्रवार को राज्य स्तरीय ‘राजस्थान पेयजल संवाद’ के प्रथम संस्करण का आयोजन किया। ‘सतत ग्रामीण पेयजल सेवाओं में समुदाय की भागीदारी’ विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य गांवों से सीधे संवाद स्थापित कर योजनाओं का जमीनी फीडबैक लेना, सफल कार्यप्रणालियों को साझा करना और सामने आ रही चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान तलाशना रहा।

जल भवन स्थित सभागार में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री कन्हैया लाल चौधरी ने की। कार्यक्रम के दौरान चयनित ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधियों, ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों के सदस्यों, आशा सहयोगिनियों, विभागीय अधिकारियों और अन्य हितधारकों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सीधा संवाद किया गया।

हर घर तक शुद्ध पानी पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता

जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री कन्हैया लाल चौधरी ने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक परिवार तक नल के माध्यम से शुद्ध, सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल पहुंचाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि ‘राजस्थान पेयजल संवाद’ जैसी पहल के माध्यम से विभाग सीधे उन गांवों से जुड़ रहा है, जहां हर घर तक नल से जल आपूर्ति शुरू हो चुकी है।

मंत्री ने कहा कि गांवों से मिलने वाला प्रत्यक्ष फीडबैक योजनाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन करने में मदद करेगा। साथ ही स्थानीय स्तर पर सामने आने वाली समस्याओं की पहचान कर उनका समयबद्ध समाधान भी किया जा सकेगा।

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उन्होंने ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इन समितियों द्वारा नियमित रूप से उपयोग शुल्क का संग्रह किए जाने से ग्रामीणों में पेयजल योजनाओं के प्रति स्वामित्व की भावना मजबूत होती है। इससे जल संरक्षण के साथ-साथ जल संसाधनों के जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग की संस्कृति को भी बढ़ावा मिलता है।

चार जिलों की ग्राम पंचायतों से हुआ सीधा संवाद

राजस्थान पेयजल संवाद कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के चार जिलों की चयनित ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधियों से सीधे बातचीत की गई। इनमें डीडवाना-कुचामन जिले की रूणीजा, झालावाड़ जिले की बानोर, प्रतापगढ़ जिले की कोटड़ी और भीलवाड़ा जिले की जालिया ग्राम पंचायत शामिल रहीं।

इन ग्राम पंचायतों के सरपंचों, ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति के सदस्यों, आशा सहयोगिनियों, विभागीय अधिकारियों और अन्य हितधारकों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम में भाग लिया और जल जीवन मिशन से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।

ग्रामीणों ने बताया कि घर-घर नियमित नल से पेयजल उपलब्ध होने के बाद विशेष रूप से महिलाओं को बड़ी राहत मिली है। पहले दूर-दराज के क्षेत्रों से पानी लाने में महिलाओं को काफी समय और मेहनत करनी पड़ती थी। नियमित जलापूर्ति शुरू होने से यह परेशानी काफी हद तक कम हुई है।

जल गुणवत्ता परीक्षण से बढ़ा लोगों का भरोसा

संवाद के दौरान ग्रामीणों ने पेयजल की गुणवत्ता को लेकर भी अपने अनुभव साझा किए। ग्रामीणों के अनुसार आशा सहयोगिनियों द्वारा नियमित रूप से किए जा रहे जल गुणवत्ता परीक्षण से लोगों का पेयजल की शुद्धता के प्रति विश्वास बढ़ा है।

जल जीवन मिशन के तहत केवल घरों तक नल कनेक्शन पहुंचाना ही नहीं, बल्कि सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण लक्ष्य है। ऐसे में गांवों में जल गुणवत्ता की नियमित जांच और लोगों को इसके प्रति जागरूक करना पेयजल सुरक्षा की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

प्रतापगढ़ की कोटड़ी बनी अनुकरणीय मॉडल

जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री कन्हैया लाल चौधरी ने प्रतापगढ़ जिले की कोटड़ी ग्राम पंचायत की जल वितरण व्यवस्था की विशेष सराहना की। उन्होंने कहा कि ग्रामवासियों के सामूहिक सहयोग और ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति की सक्रिय भूमिका के कारण यहां वर्षों से प्रत्येक घर तक नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।

मंत्री ने कोटड़ी ग्राम पंचायत के मॉडल को अन्य गांवों के लिए प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि सफल व्यवस्थाओं को दूसरे क्षेत्रों में भी अपनाने की आवश्यकता है। ग्रामीणों की भागीदारी और स्थानीय समितियों की सक्रियता से पेयजल योजनाओं की स्थिरता और बेहतर संचालन सुनिश्चित किया जा सकता है।

हर महीने आयोजित होगा राजस्थान पेयजल संवाद

मंत्री कन्हैया लाल चौधरी ने घोषणा की कि ‘राजस्थान पेयजल संवाद’ का आयोजन हर महीने किया जाएगा। इसका उद्देश्य विभाग को नियमित रूप से ग्रामीण क्षेत्रों से जमीनी फीडबैक उपलब्ध कराना है, ताकि पेयजल योजनाओं के क्रियान्वयन में आवश्यक सुधार समय पर किए जा सकें।

उन्होंने कहा कि यह संवाद विभाग और ग्रामीण समुदाय के बीच एक प्रभावी और नियमित संपर्क माध्यम के रूप में काम करेगा। इसके जरिए योजनाओं की प्रगति, जलापूर्ति की स्थिति और स्थानीय समस्याओं की जानकारी सीधे ग्रामीणों से प्राप्त की जा सकेगी।

राजस्थान में जल संरक्षण सबसे बड़ी जरूरत

जल जीवन मिशन के मिशन निदेशक राजन विशाल ने कहा कि राजस्थान का प्रत्येक नागरिक पानी की एक-एक बूंद के महत्व को समझता है। उन्होंने बताया कि देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा राजस्थान में है, जबकि राज्य के पास उपलब्ध सतही जल संसाधन देश के कुल संसाधनों का केवल लगभग एक प्रतिशत है।

ऐसी भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों को देखते हुए राज्य में जल संरक्षण और जल स्रोतों के प्रभावी प्रबंधन की आवश्यकता और भी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जल संरक्षण, जल स्रोतों के बेहतर प्रबंधन और प्रदेश के प्रत्येक घर तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है।

13,850 गांवों को शत-प्रतिशत लाभ, 6,172 गांवों को ‘हर घर जल’ प्रमाणन

कार्यक्रम के दौरान जल जीवन मिशन की प्रगति से जुड़े आंकड़े भी साझा किए गए। बताया गया कि प्रदेश में अब तक 13,850 गांव जल जीवन मिशन के तहत शत-प्रतिशत लाभान्वित हो चुके हैं। वहीं 6,172 गांवों को ‘हर घर जल’ प्रमाणन प्राप्त हो चुका है।

संवाद के दौरान निरंतर जलापूर्ति, जल वितरण व्यवस्था, ‘हर घर जल’ प्रमाणन, अवैध कनेक्शनों पर कार्रवाई, ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों की सक्रियता, जल गुणवत्ता परीक्षण और शिकायत निवारण व्यवस्था सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।

ग्रामीण भागीदारी से मजबूत होगा जल जीवन मिशन

राजस्थान जैसे जल संकट से प्रभावित राज्य में पेयजल योजनाओं की सफलता के लिए केवल सरकारी स्तर पर किए जा रहे प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। योजनाओं की दीर्घकालिक सफलता के लिए ग्रामीण समुदाय की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है।

‘राजस्थान पेयजल संवाद’ के माध्यम से सरकार और ग्रामीणों के बीच सीधे संवाद की व्यवस्था विकसित होने से योजनाओं की वास्तविक स्थिति और स्थानीय चुनौतियों को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिल सकती है। हर महीने होने वाला यह संवाद भविष्य में जल जीवन मिशन की योजनाओं में सुधार और ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित एवं गुणवत्तापूर्ण पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

कार्यक्रम में भीलवाड़ा जिला कलेक्टर, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अभियंता, चयनित ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधि और संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

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