जयपुर: राजस्थान सरकार के कार्मिक विभाग (DOP) का एक हालिया आदेश इन दिनों सचिवालय और पावर गैलरी में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। ’30 दिन से ज्यादा एपीओ (APO) न रखने’ के नियम की पालना सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने एक अनूठा रास्ता निकाला है। इस आदेश के तहत, 2 सहायक अनुभाग अधिकारी (ASO) और 14 लिपिक ग्रेड प्रथम को रजिस्ट्रार/डीआर कार्यालय के अधीन करते हुए उन्हें सरकारी भवनों, बाथरूम, शौचालयों और बिजली-पानी के उपकरणों के निरीक्षण व रख-रखाव की जिम्मेदारी सौंप दी गई है।
नियम की पालना या महज खानापूर्ति?
दरअसल, यह पूरा घटनाक्रम वित्त विभाग (FD) द्वारा जारी उस सर्कुलर की अनुपालना में हो रहा है, जिसमें स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी कर्मचारी को 30 दिन से अधिक समय तक एपीओ नहीं रखा जा सकता। इसी कड़ी में 1 जुलाई को वित्त विभाग ने विभागों से उन कर्मियों की सूची मांगी थी, जो 30 दिनों से अधिक समय से एपीओ चल रहे हैं। सरकार के इस सख्त रुख के कारण कार्मिक विभाग को आनन-फानन में इन 16 कर्मचारियों को अस्थाई रूप से यह नई जिम्मेदारी देनी पड़ गई।

जब पहले से है व्यवस्था, तो नई नियुक्ति क्यों?
जो पहले कभी ना हुआ हो, वो हो जाए तो चर्चा तो होती है। चर्चा जो एख बार चल निकले तो कोई भी गली पकड़ सकती है। और गली निकले भी क्यों ना! जब कुछ ना समझ आने पर विभाग कोई गली खोज ले जिसपर सरकारी कारिंदों को चलना हो तो चर्चा मंजिल खोजने के फेर में सरपट दौड़ पड़ती है। जितने मुंह उतनी बात। किसी को ‘ये’ लगा तो किसी को ‘वो’
चर्चाओं में कर्मचारी व अधिकारी कि प्रशासन द्वारा पहले कभी ऐसा अनूठा प्रयोग नहीं देखा, जहाँ एपीओ कार्मिकों से इस तरह के कार्यों की उम्मीद की गई हो।