Jodhpur Mojari Gets GI Tag: राजस्थान की संस्कृति सिर्फ किलों और महलों में ही नहीं, बल्कि यहाँ के पारंपरिक पहनावे और हस्तशिल्प में भी बसती है। जब भी जोधपुरी सूट या राजस्थानी साफे की बात होती है, तो पैरों में पहनी जाने वाली चमड़े की ‘जोधपुरी मोजड़ी’ के बिना वह रूप अधूरा ही रहता है। अपनी इसी खासियत और ऐतिहासिक महत्व के कारण जोधपुर की मोजड़ी को अब आधिकारिक तौर पर GI (Geographical Indication) टैग मिल गया है।
क्या है GI टैग और इसके फायदे? GI टैग किसी भी क्षेत्र के विशिष्ट उत्पाद को दिया जाता है। इस टैग के मिलने का सीधा मतलब यह है कि अब ‘जोधपुरी मोजड़ी’ पर सिर्फ और सिर्फ जोधपुर का भौगोलिक अधिकार है। दुनिया के किसी भी कोने में बैठकर कोई भी व्यक्ति जोधपुरी मोजड़ी के नाम से नकली या दूसरे शहर की बनी जूती नहीं बेच सकता। इससे जोधपुर के स्थानीय हस्तशिल्पियों और चर्मकारों को सीधा आर्थिक फायदा होगा और उनके हुनर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक प्रामाणिक ब्रांड वैल्यू मिलेगी।
जोधपुरी मोजड़ी की खासियत: यह मोजड़ी पूरी तरह से शुद्ध चमड़े से और हाथों से तैयार की जाती है। इस पर की जाने वाली बारीक कढ़ाई (कशीदाकारी) और इसके रंगों की चमक इसे दुनिया की बाकी सभी जूतियों से अलग बनाती है। यह न सिर्फ पैरों में बेहद आरामदायक होती है, बल्कि राजस्थान की रॉयल्टी (शाही अंदाज) का भी प्रतीक मानी जाती है। जोधपुरी मोजड़ी को मिला यह GI टैग साबित करता है कि राजस्थान की कला और कारीगरी का दुनिया में कोई सानी नहीं है!