जयपुर: राजस्थान के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में ‘यमुना जल समझौता’ अब धरातल पर उतरने को तैयार है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने शुक्रवार को शासन सचिवालय में यमुना जल हस्तांतरण परियोजना की पहली विस्तृत समीक्षा बैठक ली। इस महत्वाकांक्षी परियोजना से न केवल प्रदेश की पेयजल सुरक्षा को मजबूती मिलेगी, बल्कि जल संसाधनों के क्षेत्र में राजस्थान के लिए दीर्घकालिक समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा।
परियोजना की मुख्य विशेषताएं और तकनीकी ढांचा
इस विशाल परियोजना के तहत हथिनीकुंड बैराज से राजस्थान के हिस्से का यमुना जल भूमिगत पाइपलाइन के जरिए चूरू जिले के हांसियावास तक पहुंचाया जाएगा। परियोजना के प्रमुख पहलुओं में शामिल हैं:
- पाइपलाइन नेटवर्क: लगभग 295 किलोमीटर लंबी अत्याधुनिक भूमिगत पाइपलाइन प्रणाली।
- विशाल जलाशय: 386 एमसीएम (MCM) क्षमता का स्टोरेज रिजर्वायर, जो पानी की सुरक्षित उपलब्धता सुनिश्चित करेगा।
- आधुनिक बुनियादी ढांचा: प्रोजेक्ट में आधुनिक पंपिंग स्टेशन, ग्रिड सब-स्टेशन और जल परिवहन प्रणाली का विकास किया जाएगा।
जल उपलब्धता और भविष्य की राह
बैठक में जानकारी दी गई कि रेणुका, लखवार एवं किशाऊ बांधों के निर्माण के बाद राजस्थान को 201.05 एमसीएम जल वर्ष पर्यन्त उपलब्ध होगा। 34,102 करोड़ रुपये की संयुक्त विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) वर्तमान में केंद्रीय जल आयोग (CWC) के परीक्षणाधीन है। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि इस परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए केंद्र सरकार के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखा जाए।
वित्तीय मॉडल और प्रशासनिक तैयारी
परियोजना की विशाल लागत को देखते हुए, मुख्य सचिव ने इसके वित्तपोषण के लिए विश्व बैंक जैसी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं, बैंकिंग कंसोर्टियम और अन्य उपयुक्त वित्तीय मॉडलों के विकल्पों पर गंभीरता से कार्य करने को कहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भूमि अधिग्रहण, वन विभाग की स्वीकृतियां और विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) के गठन जैसी प्रशासनिक प्रक्रियाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। जल संसाधन विभाग के एसीएस अभय कुमार और वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में इस परियोजना के रोडमैप को अंतिम रूप देने पर चर्चा हुई।